खरगोश
Oryctolagus cuniculus
सौम्य, मिलनसार और आश्चर्यजनक रूप से खिलंदड़े — नस्लों और रोएँ की उल्लेखनीय विविधता वाले साथी।
View खरगोश breedsScientific classification
The खरगोश's place in the tree of life, from domain down to species.
- अधिजगतEukaryotaसुकेंद्रिक (यूकैरियोट)
- जगतAnimaliaजंतु
- संघChordataरज्जुकी (कॉर्डेट)
- वर्गMammaliaस्तनधारी
- गणLagomorphaलैगोमॉर्फ
- कुलLeporidaeखरगोश और ख़रहे
- वंशOryctolagusयूरोपीय खरगोश
- जातिOryctolagus cuniculusखरगोश
खरगोश colors, patterns and markings
Every color, pattern and marking the taxonomy records for खरगोश, by part of the body. Each breed page shows which clubs accept which ones.
फ़र
Color of the fur or hair.
Colors
घरेलू खरगोश
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे भारतीय महानगरों में खरगोश एक्जोटिक पालतू जानवर के रूप में तेज़ी से लोकप्रिय हो रहा है। यह शांत, साफ़-सुथरा और सामाजिक प्राणी सही देखभाल में ८ से १२ साल जीता है।
घरेलू खरगोश (Oryctolagus cuniculus) लेपोरिडी परिवार का एक छोटा, सामाजिक शाकाहारी स्तनपायी है। वयस्क खरगोश का वजन १ से ७ किलोग्राम और आयु ८ से १२ साल होती है। यह सुबह और शाम सबसे अधिक सक्रिय रहता है।
भारत के बड़े शहरों में पालतू खरगोश की मांग बढ़ रही है। दिल्ली के पहाड़गंज और मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट जैसी जगहों पर खरगोश मिलते हैं, हालांकि किसी भरोसेमंद ब्रीडर या रेस्क्यू सेंटर से लेना बेहतर होता है। भारतीय पशु चिकित्सकों में एक्जोटिक पेट्स की जानकारी भी धीरे-धीरे बढ़ रही है।
खरगोश अत्यंत सामाजिक प्राणी हैं। अकेले रखने पर मानसिक तनाव और अवसाद हो सकता है। रोज़ाना बातचीत और आदर्श रूप से एक साथी खरगोश होना चाहिए।
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| वैज्ञानिक नाम | Oryctolagus cuniculus |
| परिवार | Leporidae |
| वज़न | १ से ७ किलोग्राम (नस्ल के अनुसार) |
| औसत आयु | ८ से १२ साल |
| सक्रिय समय | सुबह और शाम (क्रेपस्कुलर) |
| आहार | शाकाहारी |
| देखभाल स्तर | मध्यम |
खरगोश की नस्लें
दुनिया में लगभग ३९ मान्यता प्राप्त नस्लें हैं। आकार, कोट, कान के प्रकार और रंग के आधार पर इन्हें पहचाना जाता है।
खरगोश की नस्लें बौनी (ड्वार्फ, लगभग १ किलो) से लेकर विशाल (५ किलो से अधिक) तक होती हैं। कोट छोटा, मुलायम या ऊनी हो सकता है। कान सीधे या लटके हुए (लप) होते हैं।
भारत में पालतू खरगोश के रूप में नेदरलैंड ड्वार्फ, हॉलैंड लप, रेक्स और मिनी लप नस्लें प्रचलित हैं।
| नस्ल | आकार | विशेषता |
|---|---|---|
| नेदरलैंड ड्वार्फ | बहुत छोटा (~१ किलो) | गोल चेहरा, छोटे कान, लोकप्रिय पालतू |
| हॉलैंड लप | छोटा-मध्यम | लटके कान, मैत्रीपूर्ण स्वभाव |
| रेक्स | मध्यम | मखमली कोट |
| फ्रेंच लप | बड़ा | बड़े लटके कान |
| न्यूज़ीलैंड | बड़ा | पालतू और मांस दोनों के लिए |
| कैलिफ़ोर्नियन | बड़ा | सफ़ेद शरीर, काले कान-नाक-पंजे |
| बेल्जियन हेयर | मध्यम | लंबे पैर, फुर्तीला |
| सिल्वर फॉक्स | बड़ा | सिल्वर-काला घना कोट |
खरगोश का इतिहास
घरेलू खरगोश की उत्पत्ति यूरोपीय जंगली खरगोश से हुई, जो आइबेरियन प्रायद्वीप में पाया जाता था।
घरेलू खरगोश के पूर्वज यूरोपीय जंगली खरगोश (Oryctolagus cuniculus) मूल रूप से आज के स्पेन और पुर्तगाल क्षेत्र में रहते थे। रोमनों ने पहले इन्हें छोटे बाड़ों में मांस के लिए पालना शुरू किया।
मध्ययुग में यूरोपीय मठों में खरगोश को पालतू बनाया गया। धीरे-धीरे विभिन्न नस्लें विकसित हुईं। १९वीं सदी में संगठित प्रजनन और प्रदर्शनियों के ज़रिए नस्लें मान्यता प्राप्त करने लगीं।
२०वीं सदी में खरगोश दुनिया भर में पालतू और खेती के जानवर के रूप में फैल गया। भारत में खरगोश की खेती मुख्यतः मांस और ऊन के लिए होती रही है, लेकिन शहरों में अब पालतू संस्कृति उभर रही है।
बनावट और दिखावट
खरगोश का गोल शरीर, बड़े कान और मज़बूत पिछले पैर इसे एक पहचानी जाने वाली बनावट देते हैं।
खरगोश का शरीर कॉम्पैक्ट और गोलाकार होता है। बड़े कान सुनने और शरीर की गर्मी निकालने में मदद करते हैं। आंखें सिर के दोनों तरफ होती हैं जिससे लगभग ३६० डिग्री देखने की क्षमता होती है। अगले पैर छोटे और पिछले पैर लंबे और शक्तिशाली होते हैं।
खरगोश के दांत लगातार बढ़ते रहते हैं, इसलिए पर्याप्त घास-चारा देना ज़रूरी है। पूंछ छोटी और गोल होती है।
नस्ल के अनुसार बनावट में काफ़ी अंतर होता है: कान सीधे या लटके हुए, कोट छोटा, मुलायम या ऊनी, रंग सफ़ेद से लेकर काले तक।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| वज़न | १ से ७ किलोग्राम |
| कान | सीधे या लटके हुए, गर्मी नियंत्रण में उपयोगी |
| आंखें | सिर के दोनों तरफ, व्यापक दृष्टि |
| कोट | छोटा, मुलायम या ऊनी |
| दांत | लगातार बढ़ते रहते हैं |
| पूंछ | छोटी और गोल |
स्वभाव और व्यवहार
खरगोश शिकार का जानवर है इसलिए सहज रूप से सतर्क रहता है। सही परिवेश में यह बहुत मज़ेदार और प्यारा साथी बनता है।
खरगोश एक शिकार जानवर है, इसलिए स्वाभाविक रूप से सतर्क और सावधान रहता है। अचानक आवाज़ या हलचल से डर जाता है। खतरा महसूस होने पर पिछले पैरों से ज़मीन पर ज़ोर से थपकी मारता है (थम्पिंग)। सुरक्षित और आरामदायक महसूस करने पर पूरी तरह फैलकर लेट जाता है।
स्वाभाविक व्यवहार:
- खोदना और बिल बनाना
- चीज़ें चबाना
- चारा ढूंढना (फोरेजिंग)
- अपना क्षेत्र चिह्नित करना
- खुशी में कूदना और घूमना (बिंकी)
खरगोश को गोद में उठाते समय सावधानी बरतें। हवा में लटकने पर डर जाते हैं और लात मार सकते हैं जिससे इनकी रीढ़ टूट सकती है। विश्वास बनाने में समय लगता है।
रोज़ की देखभाल
खरगोश की देखभाल नियमित और रोज़ाना की होती है। सही दिनचर्या से खरगोश स्वस्थ और खुश रहता है।
रोज़ाना के काम:
- असीमित घास-चारा (टिमोथी या ऑर्चर्ड ग्रास)
- हमेशा ताज़ा पानी
- मापी हुई मात्रा में हरी सब्ज़ियां (पालक, धनिया, मेथी के पत्ते)
- थोड़ी मात्रा में पेलेट
- कम से कम ३ से ४ घंटे खुली जगह में व्यायाम
- लिटर ट्रे रोज़ साफ़ करना
परिवेश और बाड़ा:
- बड़ा बाड़ा और व्यायाम क्षेत्र
- बिजली के तार और ज़हरीले पौधों से दूर
- छुपने की जगह (बक्सा या सुरंग)
- मज़बूत ज़मीन, तार की जाली नहीं
ग्रूमिंग:
- हफ़्ते में दो बार ब्रश करना, बाल झड़ने के मौसम में ज़्यादा
- महीने में एक बार नाखून काटना
- कभी कान से मत उठाएं, पूरे शरीर को सहारा दें
खान-पान और पोषण
सही पोषण खरगोश के दांतों और पाचन तंत्र की सेहत की बुनियाद है। घास-चारा सबसे ज़रूरी खाना है।
खाने की प्राथमिकता:
१. घास-चारा (सबसे ज़्यादा): टिमोथी, ऑर्चर्ड ग्रास या अन्य घास का चारा हमेशा उपलब्ध होना चाहिए। दांत घिसने और पाचन सही रखने के लिए ज़रूरी है।
२. ताज़ी हरी सब्ज़ियां (रोज़): भारत में आसानी से मिलने वाली सुरक्षित सब्ज़ियां: पालक, धनिया, मेथी के पत्ते, हरी पत्ती वाला लेट्यूस, पुदीना। हर दिन शरीर के वज़न का लगभग १ से २ कप।
३. पेलेट (सीमित मात्रा में): अच्छी क्वालिटी के पेलेट थोड़ी मात्रा में।
४. पानी: हमेशा ताज़ा और साफ। गर्मियों में भारत में पानी की व्यवस्था विशेष रूप से सुनिश्चित करें।
खरगोश खुद अपने नरम मल (सीकोट्रोफ) खाते हैं। यह पूरी तरह सामान्य और पोषण के लिए ज़रूरी है।
| उम्र | घास-चारा | सब्ज़ियां | पेलेट |
|---|---|---|---|
| ०-७ हफ्ते | अल्फाल्फा | नहीं | अल्फाल्फा आधारित |
| ७ हफ्ते-७ महीने | अल्फाल्फा + घास | धीरे-धीरे परिचय | अल्फाल्फा आधारित |
| ७ महीने से अधिक | घास-चारा | रोज़ भरपूर | सीमित मात्रा |
| ७ साल से अधिक | घास-चारा | रोज़ | पशु चिकित्सक की सलाह अनुसार |
स्वास्थ्य और बीमारियां
सही खाना, साफ़ परिवेश और नियमित पशु चिकित्सक जांच से खरगोश लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकता है।
सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं:
दांत की बीमारी: पर्याप्त चारा न मिलने से दांत बहुत बड़े हो जाते हैं। लक्षण: खाना कम करना, मुंह से लार टपकना।
गट स्टेसिस: पाचन तंत्र रुकने की आपातकालीन स्थिति। लक्षण: खाना बंद, मल नहीं, पीठ झुकाकर बैठना। तुरंत पशु चिकित्सक की ज़रूरत।
फ्लाईस्ट्राइक: गर्म महीनों में मक्खियां मल के पास अंडे देती हैं, कीड़े त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं। भारत के गर्म मौसम में यह खतरा ज़्यादा होता है।
बड़े नाखून: नियमित न काटने पर चलने में तकलीफ होती है।
सांस की बीमारी: नाक से पानी आना, छींकना।
| कदम | कितनी बार |
|---|---|
| पशु चिकित्सक जांच | साल में एक बार |
| दांत जांच | साल में दो बार |
| नाखून काटना | महीने में एक बार |
| फ्लाईस्ट्राइक जांच | गर्मियों में रोज़ |
| न्यूटरिंग या स्पेयिंग | ४ से ६ महीने की उम्र में |
रहने की जगह
भारत की गर्म जलवायु में खरगोश के लिए उचित और सुरक्षित बाड़ा बनाना बहुत ज़रूरी है।
आदर्श बाड़े के तत्व:
- बड़ा बाड़ा या पेन (एक खरगोश के लिए कम से कम ६x२x२ फुट)
- जुड़ा हुआ व्यायाम क्षेत्र
- मज़बूत ज़मीन (तार की जाली नहीं)
- लिटर ट्रे घास से भरा
- घास रखने का पात्र और पानी की बोतल या कटोरा
- छुपने की जगह: डिब्बा या लकड़ी की सुरंग
- चबाने के खिलौने
भारत की जलवायु में विशेष प्रबंध:
दिल्ली में मई-जून में तापमान ४५ डिग्री से ऊपर और मुंबई में साल भर आर्द्रता बहुत अधिक होती है। खरगोश को AC कमरे या मज़बूत पंखे के साथ रखें। संगमरमर या सिरेमिक टाइलें ठंडक देती हैं। बर्फ की बोतल पास रखें। गर्मियों में फ्लाईस्ट्राइक का खतरा ज़्यादा होता है इसलिए रोज़ साफ़-सफाई करें।
प्रजनन
खरगोश बहुत तेज़ी से प्रजनन करते हैं। पालतू खरगोश के लिए न्यूटरिंग या स्पेयिंग की सलाह दी जाती है।
मादा खरगोश (डो) आमतौर पर ३ से ६ महीने में यौन परिपक्वता पाती है। खरगोश प्रेरित अंडोत्सर्ग करने वाले जानवर हैं, यानी संभोग के बाद ही अंडाणु निकलता है। इसी कारण ये बहुत जल्दी गर्भवती हो सकती हैं।
गर्भकाल केवल २८ से ३१ दिन का होता है। एक बार में ४ से १२ बच्चे (किट) पैदा होते हैं। जन्म के समय बच्चे अंधे, बहरे और बिना बालों के होते हैं। लगभग १० दिन में आंखें खुलती हैं। ४ से ८ हफ्तों में दूध छुड़ाया जाता है।
खरगोश लेने से पहले
खरगोश पालना एक लंबी प्रतिबद्धता है। भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि सोच-समझकर फ़ैसला करें।
खरगोश लेने से पहले इन बातों पर ध्यान दें:
समय और प्रतिबद्धता:
- ८ से १२ साल का साथ
- रोज़ाना खाना, पानी, लिटर सफ़ाई और व्यायाम का समय
- नियमित ध्यान और साथ
रहने की जगह:
- पर्याप्त जगह और गर्मी से बचाव की व्यवस्था
- बिजली का बिल (AC के कारण)
खर्च (अनुमानित):
- शुरुआती: बाड़ा, सामान और न्यूटरिंग (INR ५,०००-१५,०००)
- मासिक: घास, पेलेट, सब्ज़ियां (INR १,०००-२,५०० प्रति माह)
- सालाना: पशु चिकित्सक जांच
सबसे अच्छा स्रोत:
- भरोसेमंद ब्रीडर या रेस्क्यू सेंटर
- त्योहारों या बच्चों के जन्मदिन पर भावनाओं में आकर न खरीदें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भारत में खरगोश पालने के बारे में आम सवालों के जवाब।
क्या खरगोश अच्छे पालतू जानवर होते हैं?
हां, लेकिन शर्त है। खरगोश शांत, साफ़ और दोस्ताना हो सकते हैं, लेकिन इन्हें विशेष देखभाल, जगह और रोज़ का समय चाहिए। बिल्ली या कुत्ते जैसे नहीं होते, लेकिन सही देखभाल में बेहद संतोषजनक साथी बनते हैं।
खरगोश कितने साल जीते हैं?
सही देखभाल में घरेलू खरगोश आमतौर पर ८ से १२ साल जीते हैं। कुछ १३ से १४ साल तक भी जी जाते हैं।
खरगोश पालने में कितना खर्च आता है?
शुरुआती खर्च में बाड़ा, सामान और न्यूटरिंग शामिल हैं (लगभग INR ५,०००-१५,०००)। मासिक खर्च में घास, पेलेट और सब्ज़ियां आती हैं (लगभग INR १,०००-२,५०० प्रति माह)। भारत में गर्मियों में AC का बिजली खर्च अतिरिक्त होता है।
खरगोश पालना कितना मुश्किल है?
मध्यम कठिनाई का। रोज़ की दिनचर्या निभानी होती है, बाड़ा साफ़ रखना होता है और भारत की गर्मी में तापमान प्रबंधन ख़ास ज़रूरी है।
क्या खरगोश बच्चों और परिवारों के लिए उपयुक्त हैं?
छोटे बच्चों के साथ सावधान निगरानी ज़रूरी है क्योंकि ग़लत तरीके से उठाने पर खरगोश की रीढ़ टूट सकती है। आठ साल से बड़े बच्चे सही तरीका सीखकर अच्छे साथी बन सकते हैं।
क्या खरगोश नए पालने वालों के लिए सही है?
थोड़ा चुनौतीपूर्ण है क्योंकि खरगोश की खास पोषण और स्वास्थ्य ज़रूरतें होती हैं। लेकिन पहले से पढ़ाई करने पर नए लोग भी सफलतापूर्वक पाल सकते हैं।
एक रखूं या दो?
दो न्यूटर्ड खरगोश एक साथ रखने पर दोनों ज़्यादा खुश और स्वस्थ रहते हैं। अकेला खरगोश अकेलेपन, अवसाद और बीमारी का शिकार हो सकता है।