लेस्टर लॉन्गवूल
लीसेस्टर लॉन्गवूल एक ऐतिहासिक लंबी-ऊन वाली भेड़ है, जो अपने चमकदार, घुँघराले ऊन और शांत, सहज स्वभाव के लिए सराही जाती है।
- Size
- बड़ा
- Lifespan
- 10–12 years
- Origin
- इंग्लैंड
- Temperament
- शांत
- Standard colors
- काला, सफ़ेद, और स्लेटी
Characteristics
लेस्टर लॉन्गवूल colors and patterns
What each club's breed standard says about every लेस्टर लॉन्गवूल color and pattern. Point at a ruling to see the club's own wording.
Breed standards describe the लेस्टर लॉन्गवूल in काला, सफ़ेद, और स्लेटी.
| Color or pattern | LLSBA US |
|---|---|
| काला | मानक (“black”) |
| सफ़ेद | मानक (“clean and white”) |
| स्लेटी | मानक (“"English Blue," which is a shaded gray”) |
| गहरा भूरा | No ruling |
| Patterns | |
| चित्तीदार | दोष (“Colored spots in white fleeces are objectionable”) |
| Color or pattern | LLSBA US |
|---|---|
| नीला | मानक (“appearance of blue”) |
| गुलाबी | मानक (“healthy pink color”) |
| Color or pattern |
|---|
| काला |
| Color or pattern | LLSBA US |
|---|---|
| काला | मानक (“black”) |
What the rulings mean
- मानक
- Described by the club's breed standard.
- दोष
- Named by the club's breed standard as a fault: the animal can be shown but is penalized.
Color changes
How a लेस्टर लॉन्गवूल's colors can change over its life.
कालाchanges toस्लेटी
फ़र · उम्र के साथ
कालाchanges toगहरा भूरा
फ़र · उम्र के साथ · from 0 to 52 weeks
कालाchanges toस्लेटी
फ़र · क्रमिक
कालाchanges toभूरा
फ़र · धूप में · can change back
सफ़ेदchanges toचित्तीदार
फ़र · क्रमिक
कालाchanges toसफ़ेद
फ़र · शारीरिक दशा के साथ · can change back
Sources
Each ruling comes from the club's published breed standard or color list.
लीसेस्टर लॉन्गवूल के बारे में
लीसेस्टर लॉन्गवूल इंग्लैंड की एक बड़ी और पुरानी भेड़ नस्ल है, जो अपने चमकदार घुंघराले ऊन और शांत स्वभाव के लिए जानी जाती है।
लीसेस्टर लॉन्गवूल इंग्लैंड की एक बड़ी घरेलू भेड़ नस्ल है, जिसे मुख्यतः इसके लंबे और चमकदार ऊन के लिए पाला जाता है, हालांकि यह मांस के लिए भी उपयोगी दोहरे-उद्देश्य वाली भेड़ है। यह लॉन्गवूल समूह से संबंधित है, जो भारी और लंबे घुंघराले ऊन वाली ब्रिटिश भेड़ों का एक परिवार है। इस नस्ल का स्वभाव शांत और सरल होता है, जिससे इसे छोटे फार्म और बड़े खेत दोनों जगह आसानी से पाला जा सकता है।
वयस्क भेड़ों की हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर चौड़ा होता है, जिस पर ऊन साफ छल्लों के रूप में लटकता है। ऊन तेजी से बढ़ता है और इसकी लंबाई अच्छी होती है, यही गुण इस नस्ल को हाथ से कातने वालों और पुरानी ऊन मिलों के बीच लोकप्रिय बनाता है। मादा भेड़ें अपने मेमनों की अच्छी देखभाल करती हैं, और नर भेड़ें आकार के हिसाब से काफी शांत स्वभाव की होती हैं।
आज कई देशों में इस नस्ल को विरासती या दुर्लभ नस्ल माना जाता है। इसे छोटे किसान, ऊन उत्पादक और संरक्षण के उद्देश्य से झुंड रखने वाले लोग पालते हैं, ताकि पुरानी वंशावली को बचाया जा सके। इसका शांत स्वभाव और उपयोगी ऊन इसे उन लोगों में मांग बनाए रखता है जो खुद कताई, बुनाई या फेल्टिंग करते हैं।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मूल स्थान | इंग्लैंड |
| आकार | बड़ा |
| आयु | 10 से 12 साल |
| समूह / भूमिका | लॉन्गवूल भेड़, दोहरे उद्देश्य वाली (ऊन और मांस) |
| किनके लिए उपयुक्त | छोटे किसान, ऊन उत्पादक, विरासती झुंड रखने वाले |
किनके लिए उपयुक्त है
लीसेस्टर लॉन्गवूल उन पालकों के लिए उपयुक्त है जो अच्छी गुणवत्ता के ऊन और शांत, बिना झंझट वाले जानवर को महत्व देते हैं। इसका आकार बड़ा होने के कारण मजबूत बाड़ और भारी भेड़ के हिसाब से बनी हैंडलिंग सुविधाएं जरूरी हैं, इसलिए यह उन लोगों के लिए बेहतर है जिनके पास पर्याप्त चरागाह और आश्रय हो। हाथ से कातने वाले और छोटे ऊन कारोबार इसके लंबे, घुंघराले ऊन की ओर आकर्षित होते हैं। इसका शांत स्वभाव इसे पहली बार भेड़ पालने वालों के लिए भी एक उचित विकल्प बनाता है, बशर्ते वे भारी ऊन की सफाई और कतरनी का काम संभाल सकें।
इतिहास और उत्पत्ति
लीसेस्टर लॉन्गवूल को 18वीं सदी के इंग्लैंड में रॉबर्ट बेकवेल के चयनात्मक प्रजनन कार्य से विकसित किया गया और बाद में यह उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंची।
इस नस्ल की जड़ें मध्य इंग्लैंड के लीसेस्टरशायर क्षेत्र से जुड़ी हैं, जहां सदियों से स्थानीय लॉन्गवूल भेड़ें पाली जाती रही हैं। 18वीं सदी में डिशले ग्रेंज के किसान रॉबर्ट बेकवेल ने इन भेड़ों पर व्यवस्थित चयनात्मक प्रजनन लागू किया, जिसमें उन्होंने तेज वृद्धि, मजबूत शरीर संरचना और भारी, एकसमान ऊन के लिए चयन किया। उनकी सुधरी हुई भेड़ें डिशले या न्यू लीसेस्टर के नाम से जानी गईं, और यही आधुनिक लीसेस्टर लॉन्गवूल की नींव बनीं।
बेकवेल के तरीके, जिनमें संतान परीक्षण और मेढ़ों को किराए पर देकर उनकी संतानों का मूल्यांकन करने की प्रथा शामिल थी, भेड़ पालन से कहीं आगे तक प्रभावशाली साबित हुए। सुधरे हुए लीसेस्टर का उपयोग ब्रिटेन और विदेशों में कई अन्य लॉन्गवूल और मिश्रित नस्ल के झुंडों को बेहतर बनाने के लिए किया गया, और इसका रक्त बाद की कई नस्लों में मौजूद है।
19वीं सदी के दौरान इस नस्ल का बड़े पैमाने पर निर्यात हुआ और यह उत्तरी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया तक पहुंची। इसे माउंट वर्नन में भी रखा गया था, और जॉर्ज वॉशिंगटन ने इस नस्ल में अपनी रुचि दर्ज की थी, यही एक कारण है कि अमेरिका में विरासती झुंड रखने वाले इस नस्ल के औपनिवेशिक काल से जुड़े इतिहास को आगे बढ़ाते हैं।
20वीं सदी में जब व्यावसायिक भेड़ पालन कम ऊन और तेजी से तैयार होने वाली नस्लों की ओर मुड़ा, तो लीसेस्टर लॉन्गवूल की संख्या तेजी से घटी और यह एक दुर्लभ नस्ल बन गई। तब से संरक्षण संगठनों और समर्पित प्रजनकों ने बची हुई वंशावली को बनाए रखा है।
रूप रंग
लीसेस्टर लॉन्गवूल एक बड़ी, चौड़े शरीर वाली भेड़ है जिसका भारी ऊन लंबे, चमकदार छल्लों में लटकता है, आमतौर पर सफेद लेकिन कभी-कभी प्राकृतिक रंग का भी।
लीसेस्टर लॉन्गवूल का शरीर लंबा और गहरा होता है, जिसकी पीठ चौड़ी और पसलियां अच्छी तरह उभरी होती हैं। मादा और नर दोनों में प्राकृतिक रूप से सींग नहीं होते। सिर और पैरों पर भारी ऊन नहीं होता, और चेहरा आमतौर पर सफेद या हल्के नीले-भूरे रंग का होता है जिस पर शांत भाव झलकता है। इसकी सबसे खास पहचान इसका ऊन है, जो शरीर के दोनों ओर लंबे, स्पष्ट छल्लों में लटकता है।
| विशेषता | सामान्य सीमा |
|---|---|
| ऊंचाई | कंधे तक लगभग 75 से 90 सेंटीमीटर |
| वजन | नर भेड़ लगभग 110 से 150 किलोग्राम; मादा भेड़ लगभग 80 से 110 किलोग्राम |
| ऊन | लंबा, चमकदार, घुंघराले छल्लों वाला ऊन जिसकी लंबाई अच्छी होती है |
| रंग | आमतौर पर सफेद; चांदी जैसे से लेकर काले तक प्राकृतिक रंग की लाइनें भी मौजूद |
| आंखें | गहरे रंग की, साफ और सजग चेहरे पर |
ऊन और रंग
ऊन ही इस नस्ल की सबसे बड़ी पहचान है। यह तेजी से बढ़ता है, इसकी लंबाई अच्छी होती है और इसमें इतनी चमक होती है कि कता हुआ धागा भी चमकदार दिखता है। ऊन सीधा न रहकर स्पष्ट छल्लों या घुंघराले रूप में गिरता है, और साल भर की वृद्धि से भारी मात्रा में ऊन मिलता है। ज्यादातर भेड़ें सफेद होती हैं, जिससे ऊन को आसानी से किसी भी रंग में रंगा जा सकता है। प्राकृतिक रंग वाले झुंड भी मौजूद हैं, जिनका रंग चांदी जैसे धूसर से लेकर लगभग काले तक होता है, और ऐसे गहरे रंग के ऊन को हाथ से कातने वाले लोग बिना रंगे इस्तेमाल करने के लिए पसंद करते हैं। साफ चेहरा और पैर होने से शरीर पर भारी ऊन होने के बावजूद कतरनी और जांच आसान रहती है।
स्वभाव
लीसेस्टर लॉन्गवूल सौम्य, शांत और आज्ञाकारी होती है, जिससे इसे संभालना आसान होता है और यह छोटे झुंडों तथा हाथों से काम करने वाले पालकों के लिए उपयुक्त है।
इस नस्ल की पहचान इसके संतुलित स्वभाव से होती है। ये भेड़ें आमतौर पर शांत रहती हैं, आसानी से घबराती नहीं हैं, और इन्हें हिलाना-डुलाना तथा संभालना आसान होता है, जो इस आकार की भेड़ के लिए महत्वपूर्ण गुण है। मादा भेड़ें सहज स्वभाव की होती हैं और झुंड की दिनचर्या में जल्दी घुल-मिल जाती हैं। नर भेड़ें भी कई अन्य नस्लों की तुलना में अधिक शांत होती हैं, हालांकि किसी भी बिना बधिया किए नर के साथ सामान्य सावधानी बरतनी चाहिए।
लोगों के साथ, अच्छी तरह से संभाली गई लीसेस्टर लॉन्गवूल नियमित संपर्क की आदी हो जाती हैं और कतरनी तथा सफाई के दौरान होने वाले नजदीकी संपर्क को सहन करती हैं। अजनबियों के आसपास भी ये आमतौर पर घबराती नहीं बल्कि शांत रहती हैं। ये आसानी से झुंड बना लेती हैं और सही तरीके से मिलवाए जाने पर बकरी या गाय जैसे मिश्रित पशुओं के साथ भी शांति से रहती हैं। इनका सौम्य स्वभाव ही मुख्य कारण है कि छोटे किसान और ऊन पालक इस नस्ल को चुनते हैं।
| गुण | अंक |
|---|---|
| स्नेह (संभालने वाले के प्रति) | 3 |
| ऊर्जा | 2 |
| प्रशिक्षण क्षमता | 3 |
| आवाज करने की प्रवृत्ति | 2 |
| बाल झड़ना | 1 |
देखभाल और सफाई
देखभाल में नियमित कतरनी और छंटाई से भारी ऊन का प्रबंधन, अच्छे चरागाह की सुविधा, तथा आश्रय के साथ नियमित खुर और परजीवी जांच शामिल है।
ऊन की देखभाल
- साल में कम से कम एक बार कतरनी करें; कुछ पालक कताई के लिए ऊन की लंबाई नियंत्रित रखने हेतु साल में दो बार कतरनी करते हैं।
- ऊन की छंटाई करें और उसे साफ रखें, क्योंकि लंबे छल्लों में पौधों के अवशेष, कीचड़ और गंदगी फंस जाती है।
- पिछले हिस्से और पेट के आसपास ऊन के गुच्छे बनने की जांच करें, और स्वच्छता के लिए जरूरत पड़ने पर गंदे ऊन को काटें।
- खुरों की नियमित रूप से कटाई करें ताकि वे बढ़ें नहीं और लंगड़ापन न हो।
व्यायाम
- रोजाना चरने और घूमने के लिए पर्याप्त चरागाह उपलब्ध कराएं।
- जहां संभव हो, बाड़ों को बदलते रहें ताकि चारे की गुणवत्ता बनी रहे और परजीवियों का असर कम हो।
- झुंड को स्वतंत्र रूप से घूमने की जगह दें, जिससे इतनी बड़ी नस्ल की सेहत ठीक बनी रहे।
वातावरण
यह नस्ल समशीतोष्ण जलवायु में अच्छी घास पर बेहतर पनपती है। भारी ऊन इसे ठंड और बारिश से बचाता है, इसलिए मुख्य चिंता गर्मी और उमस को लेकर होती है, जहां कतरनी से पहले लंबा ऊन गर्मी के तनाव का कारण बन सकता है। भारत जैसी गर्म, उमस भरी जलवायु और मानसून के मौसम में इस बात का खास ध्यान रखना जरूरी है। छाया, हर समय साफ पानी, और ब्याने के समय तथा खराब मौसम के लिए सूखा आश्रय उपलब्ध कराएं। बड़ी भेड़ के अनुरूप मजबूत बाड़ जरूरी है, साथ ही एक ऐसी हैंडलिंग जगह भी जहां एक व्यक्ति अकेले कतरनी, खुर की देखभाल और नियमित इलाज सुरक्षित तरीके से कर सके।
पोषण और आहार
लीसेस्टर लॉन्गवूल अच्छे चरागाह और भूसे पर पनपती है, प्रजनन, गर्भावस्था के अंतिम चरण और दूध देने के दौरान अतिरिक्त आहार और खनिज दिए जाते हैं।
यह नस्ल एक चरने वाला जुगाली करने वाला पशु है, और आहार का आधार अच्छी गुणवत्ता का चारा होना चाहिए। बढ़ते मौसम में अच्छे चरागाह पर वयस्क भेड़ें अपनी अधिकांश जरूरतें सिर्फ घास से पूरी कर सकती हैं। सर्दी या सूखे के दौरान चराई की जगह भूसा दिया जाता है। गर्भावस्था के अंतिम चरण, दूध देने के समय, प्रजनन से पहले और बढ़ते हुए मेमनों के लिए अतिरिक्त दाना दिया जाता है। साफ पानी की लगातार उपलब्धता जरूरी है, खासकर भारी शरीर वाली भेड़ों और दूध देने वाली मादा भेड़ों के लिए।
| जीवन अवस्था | प्रतिदिन मात्रा | भोजन की संख्या |
|---|---|---|
| सामान्य स्थिति (सूखी वयस्क भेड़) | अच्छा चरागाह, या लगभग 1.5 से 2 किलोग्राम भूसा | खुली चराई |
| गर्भावस्था का अंतिम चरण | चारा और लगभग 0.3 से 0.7 किलोग्राम दाना | 1 से 2 |
| दूध देने वाली मादा भेड़ | चारा और लगभग 0.5 से 1 किलोग्राम दाना | 2 |
| बढ़ता हुआ मेमना | चारा और नापी हुई मात्रा में विशेष दाना | 2 |
नाश्ता और सप्लीमेंट
भेड़ों के लिए विशेष रूप से बना खुला मिनरल या मिनरल ब्लॉक दें, जिसमें नमक और सूक्ष्म तत्व हों लेकिन तांबे की मात्रा कम हो। जहां मिट्टी में कमी हो, वहां पशु चिकित्सक की सलाह पर सेलेनियम और अन्य सूक्ष्म तत्व देने की जरूरत पड़ सकती है। नाश्ते के रूप में उपयुक्त सब्जियों या फलों की थोड़ी मात्रा दी जा सकती है, लेकिन आहार का बड़ा हिस्सा चारा ही होना चाहिए। किसी भी नए आहार को धीरे-धीरे शामिल करें ताकि एसिडोसिस या पेट फूलने जैसी पाचन संबंधी समस्याएं न हों।
सेहत और उम्र
लीसेस्टर लॉन्गवूल आमतौर पर मजबूत होती है और 10 से 12 साल जीती है, इसमें मुख्य खतरे आंतरिक परजीवी, खुर की समस्याएं और फ्लाईस्ट्राइक जैसी ऊन संबंधी स्थितियां हैं।
यह एक मजबूत और पुरानी स्थापित नस्ल है जिसमें कोई व्यापक नस्ल-विशेष बीमारी नहीं पाई जाती, और इसकी सामान्य उम्र 10 से 12 साल होती है। सभी भेड़ों की तरह, अधिकांश सेहत की समस्याएं आनुवंशिकी से ज्यादा प्रबंधन की कमी से आती हैं। भारी ऊन के कारण फ्लाईस्ट्राइक और सफाई पर खास ध्यान देना पड़ता है, और इसके आकार के चलते खुर की सेहत भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
| समस्या | लक्षण | टिप्पणी |
|---|---|---|
| आंतरिक परजीवी (कीड़े) | वजन घटना, दस्त, खून की कमी, खराब ऊन | मल में अंडों की गिनती और चरागाह बदलने की विधि अपनाएं |
| फुटरॉट / फुट स्काल्ड | लंगड़ापन, बदबू, खुर के सींग का अलग होना | कटाई करें, इलाज करें और जमीन सूखी रखें |
| फ्लाईस्ट्राइक | बेचैनी, गीला गंदा ऊन, कीड़े (मैगट) | गर्म महीनों में सबसे ज्यादा खतरा; पिछला हिस्सा साफ रखें |
| मैस्टाइटिस (थन की सूजन) | गर्म या सख्त थन, खाना कम खाना, बीमार मेमना | दूध देने वाली भेड़ों को प्रभावित करता है; तुरंत इलाज करें |
| गर्भावस्था विषाक्तता | कमजोरी, गर्भावस्था के अंतिम चरण में खाना कम खाना | गर्भावस्था के अंतिम चरण के पोषण से जुड़ा |
रोकथाम की देखभाल
- नियमित रूप से सभी को दवा देने के बजाय मल में अंडों की गिनती पर आधारित परजीवी नियंत्रण योजना अपनाएं।
- नियमित रूप से खुरों की कटाई और जांच करें और फुटरॉट का जल्दी इलाज करें।
- पिछला हिस्सा साफ रखें और फ्लाईस्ट्राइक के मौसम से पहले कतरनी या सफाई करें।
- क्षेत्र के अनुसार उचित टीकाकरण कार्यक्रम बनाए रखें, जैसे क्लॉस्ट्रिडियल बीमारियों से बचाव।
- चयापचय संबंधी बीमारी रोकने के लिए गर्भावस्था के अंतिम चरण में सही पोषण दें।
- झुंड में शामिल करने से पहले नए आए पशुओं को अलग रखें (क्वारंटीन)।
प्रजनन
लीसेस्टर लॉन्गवूल मादा भेड़ें मौसमी प्रजनक होती हैं और लगभग पांच महीने की गर्भावस्था के बाद ब्याती हैं, आमतौर पर एक या दो मेमनों की अच्छी देखभाल करती हैं।
यह नस्ल अपने पहले साल के भीतर ही प्रजनन योग्य उम्र तक पहुंच जाती है, हालांकि कई पालक मादा भेड़ों के पहले प्रजनन से पहले उनके पूरी तरह विकसित होने का इंतजार करते हैं। प्रजनन मौसमी होता है, मादा भेड़ें पतझड़ में गर्मी में आती हैं और लगभग पांच महीने की गर्भावस्था के बाद वसंत में ब्याती हैं। मेढ़ों को एक तय अवधि के लिए मादा झुंड के साथ रखा जाता है ताकि ब्याने का समय एक साथ आए।
आमतौर पर एक बार में एक या दो मेमने पैदा होते हैं, और अच्छी सेहत वाली मादा भेड़ों में जुड़वां मेमने आम हैं। मादा भेड़ें ध्यान रखने वाली मां होती हैं और उनका दूध अच्छा होता है, जिससे मेमने मजबूत पैदा होते हैं। मेमनों को आमतौर पर कुछ महीनों की उम्र में दूध छुड़ाया जाता है, जब वे चारा और दाना ठीक से खाने लगते हैं। चूंकि यह नस्ल बड़ी है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान मादा भेड़ की सेहत पर ध्यान देने से आसान ब्यांत और मजबूत मेमने सुनिश्चित होते हैं। संरक्षण में लगे प्रजनक इस दुर्लभ नस्ल की सीमित वंशावली बनाए रखने के लिए सावधानी से वंश-रिकॉर्ड रखते हैं।
| पैमाना | मान |
|---|---|
| प्रजनन मौसम | मौसमी, पतझड़ में मिलन और वसंत में मेमने |
| पहले प्रजनन की उम्र | अक्सर लगभग 1 साल, जब पूरी तरह विकसित हो चुकी हो |
| गर्भावस्था अवधि | लगभग 145 से 150 दिन (करीब 5 महीने) |
| मेमनों की संख्या | आमतौर पर 1 से 2 |
| दूध छुड़ाने की उम्र | लगभग 3 से 4 महीने |
| मातृत्व गुण | मजबूत; अच्छा दूध और ध्यान रखने वाली मादा भेड़ें |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
लीसेस्टर लॉन्गवूल से जुड़े आम सवालों में इसका आकार, स्वभाव, देखभाल की जरूरतें, उम्र, उपयुक्तता और उपलब्धता शामिल हैं।
लीसेस्टर लॉन्गवूल कितनी बड़ी होती है?
यह एक बड़ी भेड़ है। नर भेड़ों का वजन आमतौर पर 110 से 150 किलोग्राम और मादा भेड़ों का 80 से 110 किलोग्राम होता है, और कंधे तक इनकी ऊंचाई लगभग 75 से 90 सेंटीमीटर होती है।
इस नस्ल का स्वभाव कैसा होता है?
यह सौम्य, शांत और आज्ञाकारी होती है। नस्ल का स्वभाव अच्छा और संभालने में आसान होता है, यही एक कारण है कि छोटे किसान और ऊन पालक इसे पसंद करते हैं।
क्या लीसेस्टर लॉन्गवूल की देखभाल करना मुश्किल है?
सबसे ज्यादा अतिरिक्त काम भारी ऊन का प्रबंधन है, जिसके लिए नियमित कतरनी और फ्लाईस्ट्राइक से बचाव के लिए ऊन की सफाई जरूरी होती है। नियमित खुर देखभाल, परजीवी नियंत्रण और अच्छा चरागाह बाकी जरूरतें पूरी करते हैं, इसलिए यह उन पालकों के लिए उपयुक्त है जो खुद हाथों से काम कर सकते हैं।
लीसेस्टर लॉन्गवूल कितने साल जीती है?
अच्छे प्रबंधन के साथ इसकी सामान्य उम्र लगभग 10 से 12 साल होती है।
यह नस्ल किनके लिए सबसे उपयुक्त है?
यह उन छोटे किसानों, हाथ से कातने वालों और ऊन उत्पादकों के लिए उपयुक्त है जो लंबा, चमकदार ऊन और शांत जानवर चाहते हैं, और जिनके पास बड़ी भेड़ के लिए मजबूत बाड़ और आश्रय मौजूद है।
क्या लीसेस्टर लॉन्गवूल आसानी से मिल जाती है?
कई देशों में इसे विरासती या दुर्लभ नस्ल माना जाता है, इसलिए इसकी उपलब्धता सीमित है। आमतौर पर सामान्य व्यावसायिक बाजार के बजाय समर्पित प्रजनकों और संरक्षण झुंडों से ही भेड़ें मिलती हैं।
इसके ऊन का इस्तेमाल किस लिए होता है?
लंबा, घुंघराला और चमकदार ऊन हाथ से कातने वालों, बुनकरों और फेल्ट बनाने वालों के बीच बेशकीमती माना जाता है, और सफेद तथा प्राकृतिक रंग दोनों तरह के धागे के लिए इसकी अहमियत है।
From the community
Ask about the लेस्टर लॉन्गवूलNo questions about the लेस्टर लॉन्गवूल yet. Be the first to ask.