सुमात्रा
सुमात्रा इंडोनेशिया का एक चमकदार, लंबी पूँछ वाला सजावटी मुर्गा है, जिसे उसके चमकीले हरे-काले पंखों और सुंदर, सतर्क भाव-भंगिमा के लिए सराहा जाता है।
- Size
- मध्यम
- Lifespan
- 6–9 years
- Origin
- इंडोनेशिया
- Temperament
- सतर्क
- Standard colors
- काला, सफ़ेद, और नीला and 2 more
Characteristics
सुमात्रा colors and patterns
What each club's breed standard says about every सुमात्रा color and pattern. Point at a ruling to see the club's own wording.
Breed standards describe the सुमात्रा in काला, सफ़ेद, नीला, भूरा, और लाल. Standard patterns: एकरंगा, किनारीदार, बर्चन, और काली छाती लाल.
| Color or pattern | APA | PCGB | EE | ABA |
|---|---|---|---|---|
| काला | मानक (“Black”) | मानक (“The black”) | मानक (“schwarz; schwarz-rot; wildfarbig”) | मानक (“Black”) |
| सफ़ेद | No ruling | मानक (“The white”) | मानक (“weiß”) | मानक (“White”) |
| नीला | मानक (“Blue”) | मानक (“The blue”) | मानक (“blau-gesäumt”) | मानक (“Blue”) |
| भूरा | No ruling | No ruling | मानक (“wildfarbig”) | No ruling |
| लाल | No ruling | No ruling | मानक (“wildfarbig; schwarz-rot”) | No ruling |
| Patterns | ||||
| एकरंगा | मानक (“Black”) | मानक (“The black; The white”) | मानक (“schwarz; weiß”) | मानक (“Black; White”) |
| किनारीदार | मानक (“Blue”) | मानक (“The blue”) | मानक (“blau-gesäumt”) | मानक (“Blue”) |
| बर्चन | No ruling | No ruling | मानक (“schwarz-rot”) | No ruling |
| काली छाती लाल | No ruling | No ruling | मानक (“wildfarbig”) | No ruling |
| Color or pattern | APA | PCGB |
|---|---|---|
| काला | No ruling | मानक (“Eyes very dark brown or black (black preferred).”) |
| गहरा भूरा | मानक (“Dark brown.”) | मानक (“Eyes very dark brown or black (black preferred).”) |
| Color or pattern |
|---|
| काला |
| Color or pattern | APA |
|---|---|
| काला | मानक (“Legs and Toes: Black or dark slate.”) |
| स्लेट-नीला | मानक (“Legs and Toes: Black or dark slate.”) |
| Color or pattern | APA | PCGB |
|---|---|---|
| काला | No ruling | मानक (“Face, comb, ear-lobes and throat black or gypsy faced . Red colour in comb, face or throat.”) |
| लाल | मानक (“Wattles and Ear-Lobe: Dark red.”) | मानक (“Face, comb, ear-lobes and throat black or gypsy faced . Red colour in comb, face or throat.”) |
| जामुनी | मानक (“Comb and Face: Purple.”) | मानक (“Face, comb, ear-lobes and throat black or gypsy faced . Red colour in comb, face or throat.”) |
काला
जंगली रंग
| Color or pattern | EE |
|---|---|
| काला | मानक (“wildfarbig”) |
| भूरा | मानक (“wildfarbig”) |
| लाल | मानक (“wildfarbig”) |
| Patterns | |
| काली छाती लाल | मानक (“wildfarbig”) |
नीला
लाल बर्चन
What the rulings mean
- मानक
- Described by the club's breed standard.
- अयोग्य ठहराने वाला
- The club's breed standard disqualifies an animal of this color or pattern.
Color changes
How a सुमात्रा's colors can change over its life.
कालाchanges toपट्टीदार
पंख · उम्र के साथ · males only
Sources
Each ruling comes from the club's published breed standard or color list.
सुमात्रा मुर्गी के बारे में
सुमात्रा इंडोनेशिया की एक मध्यम आकार की शोभा वाली मुर्गी नस्ल है, जो चमकीले हरे-काले पंखों, लंबी बहती पूंछ और सतर्क, स्वतंत्र स्वभाव के लिए जानी जाती है।
सुमात्रा मुर्गी की उत्पत्ति इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर हुई थी। यह हल्की और फुर्तीली मुर्गी है, जिसके काले पंखों पर अच्छी रोशनी में हरी चमक दिखाई देती है। इस नस्ल को मुख्यतः इसके रूप रंग के लिए पाला जाता है, मांस या अंडे के उत्पादन के लिए नहीं, और समर्पित मुर्गीपालन संग्रहों के बाहर यह कम ही देखने को मिलती है।
एक वयस्क सुमात्रा का वजन लगभग 1.8 से 2.7 किलोग्राम होता है, जो इसे मुर्गियों में मध्यम आकार की श्रेणी में रखता है। इस नस्ल का शरीर नीचा और लगभग क्षैतिज होता है, और मुर्गों की पूंछ इतनी लंबी और फैली हुई होती है कि शरीर से काफी आगे तक बहती है। मुर्गियां आकार में छोटी होती हैं और उनकी पूंछ भी छोटी होती है, लेकिन रंग वही गहरा और चमकदार रहता है।
सुमात्रा मुर्गियां चारे की तलाश में सक्रिय रहती हैं और ज्यादातर घरेलू नस्लों की तुलना में कहीं बेहतर उड़ान भरती हैं। इंसानों के आसपास ये सतर्क और संकोची रहती हैं और नियमित रूप से हाथ लगाकर न पाला जाए तो दूरी बनाए रखती हैं। यह नस्ल उन पालकों के लिए उपयुक्त है जो पालतूपन या उत्पादन से ज्यादा शोभा और स्वाभाविक व्यवहार को महत्व देते हैं।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मूल स्थान | इंडोनेशिया (सुमात्रा द्वीप) |
| आकार | मध्यम (लगभग 1.8 से 2.7 किलोग्राम) |
| जीवनकाल | 6 से 9 वर्ष |
| समूह / भूमिका | शोभा की मुर्गी |
| इनके लिए उपयुक्त | अनुभवी पालक, बड़े सुरक्षित बाड़े, शांत स्वभाव के साथी पक्षी |
सुमात्रा किनके लिए उपयुक्त है
सुमात्रा उन पालकों के लिए सही है जो एक आकर्षक, आत्मनिर्भर मुर्गी चाहते हैं और जगह के साथ ढका हुआ बाड़ा दे सकते हैं। इसकी तेज उड़ान और सतर्क स्वभाव के कारण यह छोटे आंगन या हाथ से सधी पालतू मुर्गी चाहने वाले घरों के लिए कम उपयुक्त है। जो पालक चूजे की उम्र से ही धैर्यपूर्वक इन्हें संभालते हैं, उन्हें सबसे शांत स्वभाव वाली मुर्गियां मिलती हैं।
इतिहास और उत्पत्ति
सुमात्रा नस्ल का विकास इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर हुआ और उन्नीसवीं सदी के मध्य में यह पश्चिमी मुर्गीपालकों तक पहुंची, जहां इसे शोभा की मुर्गी के रूप में विकसित किया गया।
सुमात्रा का नाम इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप से लिया गया है, जहां पश्चिमी दुनिया की दिलचस्पी से बहुत पहले स्थानीय लोग इस प्रकार की मुर्गियां पालते थे। शुरुआती विवरणों में चमकदार काले, लंबी पूंछ वाले पक्षियों का जिक्र मिलता है, जो इंडोनेशियाई द्वीपसमूह के कुछ हिस्सों में अर्ध जंगली अवस्था में रहते थे।
यह नस्ल उन्नीसवीं सदी के मध्य में अमेरिका और यूरोप लाई गई। 1840 और 1850 के दशकों में हुए आयात से इन गहरे रंग की चमकदार मुर्गियों का परिचय उन मुर्गीपालन शौकीनों से हुआ जो इनकी असाधारण चमक और बहती पूंछ को खासा महत्व देते थे। उस समय इन पक्षियों को कभी कभी लड़ाकू मुर्गों की नस्लों से जोड़ा जाता था, हालांकि बाद में इनकी पहचान इनके रूप रंग पर ही टिकी।
इसके बाद के दशकों में, प्रजनकों ने हरे काले पंखों, नीचे झुके शरीर और लंबी पूंछ पर चयन किया, जो आज की सुमात्रा मुर्गी की पहचान हैं। सुमात्रा को 1883 में इसके काले रूप में अमेरिकन पोल्ट्री एसोसिएशन के स्टैंडर्ड ऑफ परफेक्शन में शामिल किया गया, और बाद में नीले रंग की किस्म को भी मान्यता मिली।
सुमात्रा कभी भी उत्पादन के लिए आम नस्ल नहीं रही। यह आज भी शोभा के शौकीनों और प्रदर्शनी प्रजनकों तक सीमित है, और मुख्यधारा की अंडा या मांस देने वाली नस्लों की तुलना में इसकी संख्या कम ही है।
रूप रंग और नस्ल मानक
सुमात्रा एक दुबली, नीचे बैठी मुर्गी है जिसके चमकदार हरे काले पंख, लंबी बहती पूंछ और छोटी मटर के आकार की कलगी इसे एक अलग शोभादार रूप देते हैं।
सुमात्रा का शरीर लंबा, नीचा और लगभग क्षैतिज होता है। सबसे खास बात इसकी पूंछ है, जो मुर्गों में भरपूर और बहती हुई होती है, साथ ही लंबे और अच्छी तरह मुड़े हुए हंसिया के आकार के पंख होते हैं। पूरे शरीर पर पंख काले होते हैं जिन पर तेज हरी चमक रहती है, जिसे कभी कभी भृंग हरा रंग भी कहा जाता है। इस नस्ल की कलगी छोटी और मटर के आकार की होती है, चेहरा गहरे रंग का होता है, और कई पक्षियों की हर टांग पर एक से अधिक पैने कांटे होते हैं।
| गुण | मानक |
|---|---|
| ऊंचाई | नीचा, क्षैतिज ढांचा; कुल लंबाई लगभग 45 से 55 सेंटीमीटर |
| वजन | मुर्गा लगभग 2.3 से 2.7 किलोग्राम; मुर्गी लगभग 1.8 से 2.0 किलोग्राम |
| पंख | सटे हुए, चमकदार पंख और लंबी बहती पूंछ |
| रंग | काला (हरी चमक के साथ); नीला रंग भी मान्य |
| आंखें | गहरे भूरे से लगभग काले रंग की |
पंख और रंग
काला रंग इस नस्ल का मूल और सबसे आम रूप है। इसके पंखों पर धातु जैसी हरी चमक होती है, जो सीधी रोशनी में सबसे साफ दिखती है। नीली किस्म के शरीर का रंग स्लेटी नीला होता है और इसे कम ही पाला जाता है। चेहरा, कलगी और लोलकी गहरे रंग के होते हैं, और टांगें काली होती हैं, जिन पर अक्सर हल्की हरी झलक भी दिखती है। इस नस्ल की पहचान पंखों की साफ चमक से होती है, इसलिए प्रदर्शनी में पंखों की गुणवत्ता और रंग की गहराई सबसे मायने रखती है।
स्वभाव और व्यवहार
सुमात्रा मुर्गियां स्वतंत्र, सतर्क और संकोची स्वभाव की होती हैं, सक्रिय रूप से चारा खोजती हैं और अच्छी उड़ान भरती हैं, और जब तक कम उम्र से न संभाला जाए, इंसानों से दूरी बनाए रखती हैं।
सुमात्रा में आज भी अर्ध जंगली मुर्गी जैसा सतर्क और आत्मनिर्भर स्वभाव काफी हद तक बचा हुआ है। ये सक्रिय रूप से चारा ढूंढती हैं, दूर दूर तक घूमती हैं और मौका मिलते ही ऊंचाई पर बसेरा करती हैं। इनकी उड़ान इतनी तेज होती है कि भारी नस्लों को रोकने वाली बाड़ भी ये आसानी से लांघ जाती हैं, इसलिए सुरक्षित या ढका हुआ बाड़ा जरूरी है।
इंसानों के आसपास यह नस्ल संकोची रहती है और दूरी बनाए रखती है। सुमात्रा मुर्गियां शायद ही कभी गोद में बैठने वाली बनती हैं, हालांकि चूजे की उम्र से शांत और लगातार संभाल मिलने पर वयस्क होकर ये कुछ हद तक सहज हो जाती हैं। ये सतर्क रहती हैं और किसी भी हलचल पर जल्दी प्रतिक्रिया देती हैं।
अन्य पक्षियों के साथ यह नस्ल स्थिर झुंड में आमतौर पर आसानी से रह लेती है, लेकिन मुर्गे प्रतिद्वंद्वी नरों के प्रति अपना इलाका जताने लगते हैं। मुर्गियां शांत और कम दबंग होती हैं। यह नस्ल न ज्यादा शोर करती है न बिल्कुल चुप रहती है, और इसका सतर्क स्वभाव इसे अनजानी हलचल पर अक्सर आवाज देने पर मजबूर करता है।
| गुण | रेटिंग |
|---|---|
| स्नेह | 2 |
| ऊर्जा | 5 |
| प्रशिक्षण क्षमता | 2 |
| आवाज | 3 |
| पंख झड़ना (मोल्ट तीव्रता) | 3 |
देखभाल और पालन
सुमात्रा को सुरक्षित ढका हुआ बाड़ा, चारा खोजने और उड़ने के लिए जगह, और चमकदार पंखों को अच्छी हालत में रखने के लिए नियमित पंख व स्वास्थ्य जांच चाहिए।
रोजमर्रा की देखभाल में जगह, सुरक्षा और सफाई का ध्यान रखना सबसे जरूरी है। यह नस्ल मजबूत और सक्रिय है लेकिन उड़ाकू भी है, इसलिए बाड़ा मजबूत रखना और शिकारियों से बचाव मुख्य व्यावहारिक चिंताएं हैं।
पंख और सफाई
- लंबी पूंछ के पंखों को टूटने, गंदगी और कीचड़ के लिए नियमित रूप से जांचें
- बिछावन सूखा रखें ताकि पंख साफ और चमकदार बने रहें
- बाहरी परजीवियों को नियंत्रित करने के लिए धूल स्नान की जगह दें
- गुदा क्षेत्र और पंखों की जड़ों में जूं व माइट के लिए जांच करें
- पैर साफ और कटे हुए रखें, और मुर्गों के अतिरिक्त पैने कांटों पर नजर रखें
व्यायाम
- चारा खोजने के लिए रोज बड़े बाड़े या निगरानी में खुले क्षेत्र में जाने दें
- ऊंचे बसेरे उपलब्ध कराएं, क्योंकि यह नस्ल ऊंचाई पर बैठना पसंद करती है
- इनकी तेज उड़ान को रोकने के लिए ढका हुआ बाड़ा या ऊंची बाड़ लगाएं
- स्वाभाविक चारा खोज के लिए खुरचने की जगह और जमीन पर घास फूस उपलब्ध कराएं
वातावरण
सुमात्रा कई तरह की जलवायु में ढल जाती है, लेकिन हवा और बरसाती नमी से बचाव मिलने पर यह सबसे बेहतर रहती है। इसकी छोटी मटर के आकार की कलगी बड़ी सिंगल कलगी की तुलना में शीतदंश के प्रति कम संवेदनशील होती है, जो ठंड के मौसम में मदद करती है। सीधी हवा से बचा हुआ आवास, पर्याप्त हवादार जगह और गर्मी में छाया उपलब्ध कराएं। मुर्गों की लंबी पूंछ को बिना घसीटे लटकने के लिए बसेरे में पर्याप्त ऊंचाई और चौड़ाई चाहिए।
आहार और भोजन
सुमात्रा को उम्र के अनुसार संतुलित मुर्गी आहार देने पर अच्छा स्वास्थ्य मिलता है, साथ ही चारा खोजना, बजरी और अंडे देने वाली मुर्गियों के लिए कैल्शियम भी जरूरी है।
सुमात्रा सक्रिय रूप से चारा ढूंढती है, इसलिए जगह मिलने पर इसके भोजन का अच्छा हिस्सा खुद चरने से पूरा हो सकता है। इसके आहार का आधार एक संपूर्ण व्यावसायिक मुर्गी दाना होना चाहिए, जो पक्षी की उम्र के अनुसार हो। हमेशा साफ पानी दें और चरने वाले पक्षियों के पाचन में मदद के लिए बजरी उपलब्ध कराएं।
| उम्र चरण | प्रतिदिन मात्रा | भोजन बार |
|---|---|---|
| चूजा (0 से 8 सप्ताह) | स्टार्टर क्रम्ब, इच्छानुसार उपलब्ध | पूरे दिन उपलब्ध |
| वृद्धि चरण (8 से 18 सप्ताह) | ग्रोअर आहार, लगभग 60 से 90 ग्राम | पूरे दिन या 2 बार |
| वयस्क (अंडे देने वाली मुर्गी) | लेयर आहार, लगभग 100 से 120 ग्राम | 2 बार |
| वयस्क (मुर्गा / अंडा न देने वाली) | मेंटेनेंस आहार, लगभग 90 से 110 ग्राम | 2 बार |
इनाम और पूरक आहार
इनाम स्वरूप दिए जाने वाले भोजन को दैनिक आहार का बहुत छोटा हिस्सा ही रखें, ताकि संतुलित दाना ही मुख्य भोजन बना रहे। पत्तेदार साग सब्जियां, अन्य सब्जियां, और थोड़ी मात्रा में अनाज या मीलवर्म इसके लिए उपयुक्त हैं। अंडे देने वाली मुर्गियों को कैल्शियम का अलग स्रोत चाहिए, जैसे कुचला हुआ सीप का खोल, जो इच्छानुसार उपलब्ध कराया जाए। चारा खोजने वाले सभी पक्षियों को बजरी मिलने से फायदा होता है।
स्वास्थ्य और सामान्य समस्याएं
सुमात्रा मजबूत मुर्गी है जो आमतौर पर 6 से 9 साल जीती है, और अच्छी देखभाल में मुख्य चिंता आम मुर्गी परजीवी और श्वसन संबंधी समस्याएं ही रहती हैं।
सुमात्रा एक मजबूत नस्ल है जिसमें नस्ल विशेष स्वास्थ्य समस्याएं कम ही देखने को मिलती हैं। अच्छे आवास, सफाई और नियमित परजीवी नियंत्रण के साथ ये पक्षी आमतौर पर 6 से 9 साल तक जीते हैं। छोटी मटर के आकार की कलगी ठंड के मौसम में शीतदंश का खतरा कम करके कुछ फायदा देती है। जो भी स्वास्थ्य समस्याएं आती हैं, वे आम तौर पर मुर्गियों में दिखने वाली परजीवी, श्वसन संक्रमण और बड़ी उम्र की मुर्गियों में प्रजनन संबंधी परेशानियां होती हैं।
| समस्या | लक्षण | टिप्पणी |
|---|---|---|
| बाहरी परजीवी (माइट, जूं) | खुजलाना, फीके पंख, पीली कलगी | गुदा क्षेत्र और पंखों की जड़ें जांचें; पक्षियों के साथ आवास का भी उपचार करें |
| आंतरिक कृमि | वजन घटना, कमजोर स्थिति, पतला मल | मल जांच कराएं और लक्षित कृमि उपचार दें |
| श्वसन संक्रमण | छींकना, नाक से स्राव, सांस में घरघराहट | प्रभावित पक्षियों को अलग करें; पशु चिकित्सक से सलाह लें |
| कॉक्सिडियोसिस | खूनी या पानी जैसा मल, सुस्ती (अक्सर छोटे पक्षियों में) | बिछावन सूखा रखें; दवायुक्त स्टार्टर आहार रोकथाम में मदद करता है |
| प्रजनन संबंधी समस्याएं (मुर्गियां) | जोर लगाना, पेट में सूजन, अंडे देना कम होना | बड़ी उम्र की अंडे देने वाली मुर्गियों में अधिक आम; पशु चिकित्सक से जांच जरूरी |
बचाव के उपाय
- आवास साफ, सूखा और हवादार रखें
- माइट और जूं नियंत्रित करने के लिए धूल स्नान की जगह दें
- नियमित परजीवी जांच और मल परीक्षण कराएं
- नए पक्षियों को झुंड में शामिल करने से पहले अलग रखें (क्वारंटीन)
- स्थानीय टीकाकरण और जैव सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करें
- साल भर साफ पानी और संतुलित आहार दें
आवास और रहने की व्यवस्था
सुमात्रा को खुला और शिकारियों से सुरक्षित दड़बा, ऊंचे बसेरे और पूरी तरह ढका बाड़ा चाहिए, क्योंकि यह तेज उड़ान भरती है और ऊंचाई पर बैठना पसंद करती है।
सुमात्रा के आवास में इसकी तेज उड़ान और सक्रिय चारा खोज की आदत का ध्यान रखना चाहिए। ऊंचे और मजबूत बसेरों वाला सुरक्षित दड़बा इसकी जमीन से काफी ऊपर बैठने की आदत के अनुकूल रहता है। साथ लगा बाड़ा ढका होना चाहिए, क्योंकि यह नस्ल सामान्य बाड़ को आसानी से लांघ जाती है। शांत स्वभाव की नस्लों की तुलना में हर पक्षी को अतिरिक्त जगह दें, ताकि तनाव और आपसी झगड़ा कम हो।
| मानक | सुझाव |
|---|---|
| दड़बे का फर्श क्षेत्र | प्रति पक्षी न्यूनतम लगभग 0.4 वर्ग मीटर (4 वर्ग फुट) |
| बाड़े का क्षेत्र | प्रति पक्षी लगभग 1.0 से 1.5 वर्ग मीटर (10 से 15 वर्ग फुट) |
| बाड़े का आवरण | उड़ान रोकने के लिए पूरी तरह छत या जाली से ढका हो |
| बसेरे की ऊंचाई | ऊंचे बसेरे बेहतर; लंबी पूंछ के लिए ऊंची, चौड़ी छड़ें |
| अंडे देने के बक्से | हर 3 से 4 मुर्गियों पर एक बक्सा |
| हवादार व्यवस्था | बसेरे की ऊंचाई से ऊपर पर्याप्त और सीधी हवा रहित वायु प्रवाह |
व्यवस्था जांच सूची
- शिकारियों से सुरक्षित दड़बा, मजबूत कुंडी और ठोस फर्श या जमीन में दबी जाली
- भागने और आकाशीय शिकारियों से बचाव के लिए ढका हुआ बाड़ा
- लंबी पूंछ के पंखों के लिए पर्याप्त चौड़ाई और जगह वाले ऊंचे बसेरे
- पंखों की सुरक्षा के लिए सूखा, गहरा और साफ बिछावन
- हवा और बारिश से बचाव के लिए छायादार जगह
- बाड़े के भीतर धूल स्नान की जगह और साफ पानी
अंडे सेने और इनक्यूबेशन
सुमात्रा के अंडे सामान्य मुर्गी इनक्यूबेशन व्यवस्था में लगभग 21 दिन में सेते हैं, और कई मुर्गियों में अंडों पर बैठने और चूजों की देखभाल करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति अच्छी बनी रहती है।
सुमात्रा के अंडे सामान्य मुर्गी इनक्यूबेशन के तरीके से ही सेते हैं और लगभग 21 दिन में फूटते हैं। इस नस्ल में अंडों पर बैठने और चूजों को पालने की प्रवृत्ति काफी मजबूत बनी रहती है, इसलिए मौका मिलने पर मुर्गियां अक्सर खुद अच्छी तरह अंडे सेती और चूजे पालती हैं। ज्यादा संख्या में या ज्यादा नियंत्रण के लिए इनक्यूबेटर का इस्तेमाल सामान्य मुर्गी सीमा के भीतर सेटिंग रखने पर स्थिर परिणाम देता है।
| मानक | सेटिंग |
|---|---|
| तापमान | फोर्स्ड एयर इनक्यूबेटर में लगभग 37.5 डिग्री सेल्सियस (99.5 डिग्री फारेनहाइट) |
| नमी | लगभग 45 से 55 प्रतिशत, आखिरी 3 दिनों में बढ़ाकर 65 से 70 प्रतिशत |
| दिन | सेने में लगभग 21 दिन |
| पलटना | रोज कम से कम 3 से 5 बार पलटें; 18वें दिन बंद करें |
सेने की प्रक्रिया
- साफ और सही आकार के अंडे चुनें और इनक्यूबेटर में रखने से पहले इन्हें नुकीले सिरे को नीचे रखते हुए अधिकतम 7 दिन तक स्टोर करें
- अंडों को कमरे के तापमान तक गर्म होने दें और फिर इन्हें तय तापमान पर इनक्यूबेटर में रखें
- तापमान और नमी बनाए रखें, और 17वें दिन तक अंडों को पलटते रहें
- 18वें दिन पलटना बंद करें, नमी बढ़ाएं और लॉकडाउन चरण में ले जाएं
- चूजों को बिना छेड़े अपने आप सेने दें, फिर सूखे चूजों को स्टार्टर आहार और पानी के साथ गर्म ब्रूडर में शिफ्ट करें
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सुमात्रा मुर्गी से जुड़े आम सवालों में इसका आकार, स्वभाव, देखभाल की जरूरतें, जीवनकाल, उपयुक्तता और उपलब्धता शामिल हैं।
सुमात्रा मुर्गी कितनी बड़ी होती है?
सुमात्रा एक मध्यम आकार की नस्ल है। मुर्गों का वजन लगभग 2.3 से 2.7 किलोग्राम और मुर्गियों का लगभग 1.8 से 2.0 किलोग्राम होता है। मुर्गों की लंबी बहती पूंछ भी इन्हें देखने में और लंबा बना देती है।
सुमात्रा का स्वभाव कैसा होता है?
सुमात्रा स्वतंत्र, सतर्क और संकोची स्वभाव की होती है। यह सक्रिय रूप से चारा ढूंढती है, तेज उड़ान भरती है, और जब तक कम उम्र से न संभाला जाए, इंसानों से सतर्क रहती है। यह शायद ही कभी पूरी तरह पालतू और गोद में बैठने वाली बनती है।
क्या सुमात्रा को पालना मुश्किल है?
यह मजबूत और स्वस्थ नस्ल है, लेकिन शांत स्वभाव की आंगन मुर्गियों की तुलना में इसकी जरूरतें ज्यादा हैं, क्योंकि यह अच्छी उड़ान भरती है और इसे ढका हुआ, सुरक्षित बाड़ा चाहिए। यह उन पालकों के लिए उपयुक्त है जो जगह और मजबूत घेराबंदी दोनों दे सकते हैं।
सुमात्रा मुर्गियां कितने साल जीती हैं?
अच्छी देखभाल मिलने पर सुमात्रा आमतौर पर 6 से 9 साल तक जीती है। साफ आवास, परजीवी नियंत्रण और संतुलित आहार लंबी उम्र में मदद करते हैं।
क्या सुमात्रा शुरुआती पालकों या छोटे आंगन के लिए ठीक है?
यह उन अनुभवी पालकों के लिए ज्यादा उपयुक्त है जिनके पास पर्याप्त जगह हो। इसकी तेज उड़ान और संकोची स्वभाव के कारण यह छोटे आंगन या हाथ से सधी पालतू मुर्गी चाहने वाले घरों के लिए सही विकल्प नहीं है।
क्या सुमात्रा मुर्गियां ज्यादा अंडे देती हैं?
सुमात्रा एक शोभा की नस्ल है, अंडा उत्पादन के लिए नहीं। मुर्गियां छोटे से मध्यम आकार के सफेद अंडे सीमित संख्या में देती हैं, और कई में अंडों पर बैठने की प्रवृत्ति काफी मजबूत रहती है।
क्या सुमात्रा मुर्गियां आसानी से मिल जाती हैं?
यह मुर्गी आम नहीं है और मुख्यतः शोभा व प्रदर्शनी प्रजनकों के पास पाई जाती है। मुख्यधारा की नस्लों की तुलना में इसकी उपलब्धता सीमित है, इसलिए विशेषज्ञ पालकों के जरिए इसे ढूंढने में समय लग सकता है।
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