बकआई
बकआई एक मिलनसार, ठंड-सहनशील अमेरिकी नस्ल है, जो किसी महिला द्वारा विकसित एकमात्र नस्ल है, और अपने महोगनी पंखों तथा सक्रिय चारा-खोज के लिए जानी जाती है।
- Size
- मध्यम
- Lifespan
- 6–10 years
- Origin
- संयुक्त राज्य अमेरिका
- Temperament
- मित्रवत
- Standard colors
- काला और महोगनी
Characteristics
बकआई colors and patterns
What each club's breed standard says about every बकआई color and pattern. Point at a ruling to see the club's own wording.
Breed standards describe the बकआई in काला और महोगनी.
| Color or pattern | APA | ABA |
|---|---|---|
| काला | मानक (“Only One Variety”) | मानक (“Black Tailed Red as in Buckeye”) |
| महोगनी | मानक (“Only One Variety”) | मानक (“Black Tailed Red as in Buckeye”) |
| Color or pattern |
|---|
| पीला |
| Color or pattern | APA |
|---|---|
| लाल | मानक (“Reddish-bay.”) |
| नारंगी | मानक (“Reddish-bay.”) |
| लाल-भूरा | मानक (“Reddish-bay.”) |
| Color or pattern | APA |
|---|---|
| सींग | मानक (“Yellow, shaded with reddish-horn. Yellow.”) |
| पीला | मानक (“Yellow, shaded with reddish-horn. Yellow.”) |
| Color or pattern | APA |
|---|---|
| पीला | मानक (“Shanks and Toes: Yellow.”) |
| Color or pattern | APA |
|---|---|
| लाल | मानक (“Comb, Face, Wattles and Ear-Lobes: Bright red.”) |
| Color or pattern | APA |
|---|---|
| लाल | मानक (“Comb, Face, Wattles and Ear-Lobes: Bright red.”) |
| सफ़ेद | अयोग्य ठहराने वाला (“Positive enamel white covering more than one-fourth of ear-lobes”) |
| Color or pattern |
|---|
| भूरा |
What the rulings mean
- मानक
- Described by the club's breed standard.
- अयोग्य ठहराने वाला
- The club's breed standard disqualifies an animal of this color or pattern.
Color changes
How a बकआई's colors can change over its life.
कालाchanges toपट्टीदार
पंख · उम्र के साथ · males only
पीलाchanges toसफ़ेद
चोंच · शारीरिक दशा के साथ · can change back · females only
पीलाchanges toसफ़ेद
टाँगें और पैर · शारीरिक दशा के साथ · can change back · females only
Sources
Each ruling comes from the club's published breed standard or color list.
बकाई मुर्गी के बारे में
बकाई अमेरिका के ओहायो राज्य में विकसित एक मिलनसार, ठंड सहने वाली मुर्गी नस्ल है, जिसे बनाने वाली इकलौती महिला के लिए जानी जाती है, महोगनी पंख और सक्रिय चारा तलाश इसकी पहचान है।
बकाई अमेरिका की एक दोहरे उपयोग वाली मुर्गी नस्ल है, जिसे मांस और अंडे दोनों के लिए पाला जाता है। इसका नाम अमेरिका के ओहायो राज्य से पड़ा है, जिसे बकाई स्टेट कहा जाता है, जहां इस नस्ल को विकसित किया गया था। इसके पंख गहरे महोगनी लाल रंग के होते हैं, नीचे स्लेटी रंग की परत होती है, और मटर कलगी इसे ठंड सहने में मदद करती है।
बकाई मुर्गियां मध्यम आकार की होती हैं, शरीर भरा हुआ और गोल होता है। मुर्गियां भूरे अंडे देती हैं और कभी-कभी सेने पर बैठ जाती हैं। यह उन गिनी-चुनी अमेरिकी नस्लों में से एक है जिसकी कलगी मटर के आकार की होती है, यह गुण उत्तरी इलाकों की सर्दी में शीतदंश का खतरा कम करता है।
बकाई मुर्गियां खुले में चारा ढूंढने में सक्रिय रहती हैं और खुले बाड़े में अच्छी तरह पनपती हैं, जहां वे कीड़े-मकोड़े पकड़ती हैं और भोजन की तलाश में इधर-उधर घूमती हैं। इनका स्वभाव शांत और सरल माना जाता है, और ये बंद बाड़े और खुले फार्म दोनों में ढल जाती हैं, हालांकि इन्हें घूमने के लिए जगह पसंद है।
| गुण | विवरण |
|---|---|
| मूल स्थान | अमेरिका (ओहायो) |
| आकार | मध्यम |
| आयु | 6 से 10 वर्ष |
| समूह / भूमिका | दोहरे उपयोग की नस्ल (मांस और भूरे अंडे) |
| उपयुक्त | घरेलू बाड़े, ठंडे इलाके, खुला फार्म |
किसके लिए उपयुक्त है
बकाई ठंडे इलाकों के पालकों के लिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर पक्षी है। इसकी चारा खोजने की आदत इसे खुले फार्म और चरागाह वाली व्यवस्था के लिए अच्छा विकल्प बनाती है, और इसका शांत स्वभाव पारिवारिक बाड़ों के लिए ठीक बैठता है। जो लोग मांस और भूरे अंडों की नियमित आपूर्ति देने वाली परंपरागत दोहरे उपयोग की नस्ल चाहते हैं, उनके लिए बकाई एक व्यावहारिक विकल्प है।
इतिहास और उत्पत्ति
बकाई नस्ल को 1900 के दशक की शुरुआत में ओहायो में नेटी मेटकाफ ने विकसित किया था, जिससे यह किसी महिला द्वारा बनाई गई इकलौती अमेरिकी मुर्गी नस्ल बन गई।
बकाई नस्ल को ओहायो के वॉरेन शहर की नेटी मेटकाफ ने 1890 के दशक के अंत और 1900 के दशक की शुरुआत में तैयार किया। मेटकाफ एक व्यावहारिक फार्म पक्षी चाहती थीं जो ओहायो की कड़ी सर्दी झेल सके और साथ ही मांस और अंडे भी दे सके। उन्हें किसी मानक अमेरिकी मुर्गी नस्ल को विकसित करने वाली इकलौती महिला के रूप में जाना जाता है।
मेटकाफ ने बैर्ड प्लायमाउथ रॉक, बफ कोचिन और कुछ काली छाती वाली लाल गेम मुर्गियों को आपस में मिलाकर यह नस्ल तैयार की। उनका मकसद था एक मजबूत, उत्पादक मुर्गी जिसका रंग गहरा लाल हो और शरीर ठंड तथा सक्रिय चारा तलाश दोनों के अनुकूल हो।
इस नस्ल को 1904 में अमेरिकन पोल्ट्री एसोसिएशन के स्टैंडर्ड ऑफ परफेक्शन में शामिल किया गया। बीसवीं सदी के शुरुआती दशकों में छोटे फार्मों पर बकाई को उसके दोहरे उपयोग के गुणों और खुद अपना ज्यादातर भोजन जुटाने की क्षमता के लिए महत्व दिया जाता था।
बीसवीं सदी के मध्य में जब व्यावसायिक पोल्ट्री उत्पादन हावी होने लगा, तब इस नस्ल की संख्या घटती गई और बकाई दुर्लभ हो गई। इसके बाद परंपरागत पोल्ट्री पालकों और नस्ल संरक्षण संगठनों के प्रयासों से यह नस्ल लगभग खत्म होने की स्थिति से उबर पाई।
रूप-रंग और नस्ल मानक
बकाई एक मध्यम आकार की मजबूत मुर्गी है, जिसके पंख गहरे महोगनी लाल, कलगी मटर के आकार की, और टांगें पीली होती हैं।
बकाई का शरीर चौड़ा और गहरा होता है, पीठ सीधी और छाती भरी हुई होती है, जो इसके मांस के उद्देश्य को दर्शाती है। पूरे शरीर पर एक जैसा गहरा महोगनी लाल रंग होता है, नीचे स्लेटी परत रहती है, और पूंछ व निचले पंखों में काला रंग दिखता है। मटर के आकार की कलगी सिर पर नीचे बैठी होती है, जिससे ठंड का सीधा असर कम होता है।
चेहरा, कलगी, गलफड़े और कान की लोली सभी लाल रंग के होते हैं। चोंच सींग से पीले रंग की, आंखें भूरी-लाल, और टांगें व त्वचा पीली होती है। कुल मिलाकर बकाई का शरीर लंबा-दुबला नहीं बल्कि सुडौल और मांसल दिखता है।
| गुण | मानक |
|---|---|
| ऊंचाई | मध्यम, सुडौल शरीर |
| वजन | मुर्गा लगभग 9 पाउंड (4.1 किग्रा); मुर्गी लगभग 6.5 पाउंड (2.9 किग्रा) |
| पंख | कसे हुए, सख्त पंख |
| रंग | स्लेटी अंडर-कलर के साथ महोगनी लाल; पूंछ और निचले पंखों में काला |
| आंखें | भूरी-लाल |
पंख और रंग
बकाई का सिर्फ एक ही मान्यता प्राप्त रंग होता है, गहरा महोगनी लाल। यह शेड रोड आइलैंड रेड से गहरा होता है, और पंख ढीले नहीं बल्कि कसे और मजबूत होते हैं। पंख हटाकर देखने पर नीचे स्लेटी परत दिखाई देती है, और पूंछ में हल्की हरी चमक लिए काला रंग होता है। पीली टांगें और त्वचा लाल शरीर के साथ स्पष्ट कंट्रास्ट बनाती हैं।
स्वभाव और व्यवहार
बकाई मुर्गियां मिलनसार, शांत और सक्रिय होती हैं, अच्छी तरह चारा ढूंढती हैं, संभालने में सहज रहती हैं, और आमतौर पर मिश्रित बाड़े में घुल-मिल जाती हैं।
बकाई का स्वभाव सरल और संतुलित होता है। ये जिज्ञासु और सक्रिय होती हैं और खुले में छोड़े जाने पर दिन का बड़ा हिस्सा चारा ढूंढने में बिताती हैं। कई पालक बताते हैं कि यह नस्ल इंसानों के साथ सहज रहती है और उठाने-पकड़ने पर भी शांत रहती है, इसलिए यह बच्चों वाले परिवारों के लिए भी उपयुक्त है।
दूसरे पक्षियों के साथ बकाई आमतौर पर शांतिपूर्ण रहती है, हालांकि प्रजनन के मौसम में मुर्गे थोड़े आक्रामक हो सकते हैं। यह नस्ल कीड़े-मकोड़े और छोटे शिकार, यहां तक कि चूहों का भी शिकार करने में माहिर मानी जाती है, यह आदत इसे कई शांत स्वभाव वाली दोहरे उपयोग की नस्लों से अलग करती है। मुर्गियां कभी-कभी सेने पर बैठती हैं और चूजों की अच्छी देखभाल करती हैं। बकाई ज्यादा शोर नहीं करती, लेकिन सतर्क रहती है और किसी गड़बड़ी पर आवाज जरूर निकालती है।
| गुण | रेटिंग |
|---|---|
| स्नेह | 4 |
| ऊर्जा | 4 |
| प्रशिक्षण क्षमता | 3 |
| आवाज | 2 |
| पंख झड़ना (मोल्ट तीव्रता) | 3 |
देखभाल और पालन
बकाई कम देखभाल मांगने वाली, ठंड सहने वाली नस्ल है, जिसे चारा ढूंढने की जगह, बुनियादी दड़बा सुरक्षा और नियमित बाड़ा देखभाल चाहिए।
बकाई एक मजबूत नस्ल है और इसे सामान्य पोल्ट्री देखभाल के अलावा ज्यादा कुछ नहीं चाहिए। इसकी मटर कलगी और कसे हुए पंख इसे ठंडे इलाकों के लिए उपयुक्त बनाते हैं, और यह कई अन्य नस्लों से बेहतर सर्दी झेल लेती है। गर्म और उमस भरे इलाकों में इसे छाया और लगातार पानी की जरूरत रहती है, खासकर मानसून के मौसम में जब नमी बढ़ जाती है।
सफाई और रखरखाव
- नियमित संभाल के दौरान पंखों और त्वचा में जूं-चीचड़ की जांच करें
- सूखी मिट्टी में नहाने के लिए जगह दें ताकि पक्षी खुद अपने पंख साफ रख सकें
- नाखून या चोंच तभी काटें जब वे जरूरत से ज्यादा बढ़ जाएं, खुले में रहने वाले पक्षियों में यह कम होता है
- वेंट और टांगों की समय-समय पर जांच करें ताकि परजीवियों के लक्षण पकड़ में आएं
गतिविधि
- चारा ढूंढने के लिए रोज खुले मैदान या बड़े बाड़े तक पहुंच दें
- जहां संभव हो, प्रति पक्षी कम से कम 8 से 10 वर्ग फुट खुले बाड़े की जगह दें
- बाड़े के इलाके बदलते रहें ताकि जमीन की घास बनी रहे और परजीवी न बढ़ें
- स्वाभाविक हरकत को बढ़ावा देने के लिए बैठने की डंडियां और अलग-अलग तरह की जमीन दें
रहने की जगह
सूखा, हवादार और सीधी हवा से बचा हुआ दड़बा दें, जिसमें पक्षियों की ऊंचाई से ऊपर अच्छा वेंटिलेशन हो। प्रति पक्षी करीब 4 वर्ग फुट फर्श जगह और हर तीन से चार मुर्गियों पर एक अंडा-पेटी रखें। बैठने की डंडियां जमीन से ऊपर होनी चाहिए। यह नस्ल ठंड अच्छी तरह सह लेती है, फिर भी इसे हवा, बारिश और बर्फ से बचाव चाहिए।
आहार और खिलाना
बकाई को संतुलित मानक पोल्ट्री आहार के साथ चारा मिलाकर दिया जा सकता है, अंडा देने वाली मुर्गियों को ग्रिट और कैल्शियम अलग से दें।
बकाई को उसकी उम्र के अनुसार पूर्ण पोल्ट्री आहार दें। चूजों को स्टार्टर फीड, बढ़ते पक्षियों को ग्रोअर फीड, और अंडे देने वाली मुर्गियों को कैल्शियम मिला हुआ लेयर फीड चाहिए। चूंकि बकाई सक्रिय रूप से चारा ढूंढती है, इसलिए खुले में रहने वाले पक्षी कीड़े, बीज और हरी पत्तियों से अपना आहार बढ़ा लेते हैं, लेकिन संतुलित आहार ही मुख्य भोजन बना रहना चाहिए। हमेशा साफ पानी दें, और जो पक्षी साबुत अनाज या चारा खाते हैं उन्हें अघुलनशील ग्रिट दें।
| उम्र | रोजाना मात्रा | भोजन |
|---|---|---|
| चूजा (0 से 8 सप्ताह) | इच्छानुसार स्टार्टर फीड (लगभग 18 से 20% प्रोटीन) | हमेशा उपलब्ध |
| बढ़ता पक्षी (8 से 18 सप्ताह) | इच्छानुसार ग्रोअर फीड (लगभग 16% प्रोटीन) | हमेशा उपलब्ध |
| अंडे देने वाली मुर्गी | लगभग 0.25 पाउंड (110 ग्राम) लेयर फीड | इच्छानुसार भोजन और चारा |
| वयस्क मुर्गा / गैर-अंडे देने वाला पक्षी | लगभग 0.25 पाउंड (110 ग्राम) मेंटेनेंस फीड | इच्छानुसार भोजन और चारा |
अतिरिक्त आहार और पूरक
अतिरिक्त आहार सीमित मात्रा में दें ताकि यह कुल आहार का लगभग 10 प्रतिशत से ज्यादा न हो। हरी पत्तियां, कुटा हुआ मक्का और मीलवर्म पक्षियों को अच्छे लगते हैं। अंडे देने वाली मुर्गियों के लिए कैल्शियम स्रोत के तौर पर कुचला हुआ सीप का खोल इच्छानुसार दें, और साबुत अनाज या चारा खाने वाले पक्षियों को ग्रिट दें। सिर्फ स्क्रैच अनाज पर निर्भर न रहें, क्योंकि इनमें प्रोटीन कम होता है और यह आहार का संतुलन बिगाड़ सकता है।
स्वास्थ्य और आयु
बकाई मजबूत और ठंड सहने वाली नस्ल है, जिसकी सामान्य आयु 6 से 10 वर्ष होती है और नस्ल से जुड़ी बीमारियां कम पाई जाती हैं।
बकाई एक मजबूत नस्ल है जिसमें व्यापक आनुवंशिक विकार नहीं पाए जाते। इसकी मटर कलगी शीतदंश से बचाती है, और इसकी सक्रिय आदतें इसे तंदुरुस्त रखती हैं। अच्छी देखभाल मिलने पर बकाई आमतौर पर 6 से 10 वर्ष जीती है। ज्यादातर स्वास्थ्य समस्याएं नस्ल विशेष के बजाय सामान्य पोल्ट्री हालात से जुड़ी होती हैं, इसलिए परजीवी नियंत्रण और साफ दड़बा नस्ल-विशेष इलाज से ज्यादा मायने रखते हैं।
| समस्या | लक्षण | टिप्पणी |
|---|---|---|
| बाहरी परजीवी (जूं, चीचड़) | खुजलाना, फीके पंख, पीली कलगी | त्वचा और वेंट की जांच करें; दड़बे और पक्षियों दोनों का इलाज करें |
| आंतरिक कीड़े | वजन घटना, ढीली बीट, अंडा उत्पादन में कमी | बदल-बदल कर कृमिनाशक दें, पशु चिकित्सक की सलाह पर |
| सांस संबंधी संक्रमण | छींकना, नाक बहना, सांस में घरघराहट | वेंटिलेशन बेहतर करें; संक्रमित पक्षी को अलग रखें |
| बंबलफुट | पंजे में सूजन, लंगड़ाना | पर्च और बिछावन साफ और सूखे रखें |
| गर्मी का तनाव | हांफना, पंख फैलाए रखना, सुस्ती | गर्म मौसम में छाया और लगातार पानी दें |
बचाव के उपाय
- बीमारी रोकने के लिए दड़बा सूखा, हवादार और साफ रखें
- परजीवी और पैर की समस्याओं के लिए पक्षियों की नियमित जांच करें
- प्राकृतिक परजीवी नियंत्रण के लिए धूल-स्नान की जगह दें
- नए पक्षियों को बाड़े में मिलाने से पहले अलग रखें
- साल भर संतुलित आहार, ग्रिट और साफ पानी दें
आवास और दड़बा
बकाई को सूखे, हवादार दड़बे के साथ बैठने की जगह और बड़ा बाड़ा या खुला मैदान चाहिए, और यह ठंड अच्छी तरह सह लेती है।
बकाई कई तरह के आवास में ढल जाती है, बस वह सूखा और शिकारियों से सुरक्षित होना चाहिए। यह बंद बाड़े और खुले फार्म दोनों में रह सकती है, लेकिन खुली जमीन पर चारा ढूंढने का मौका मिलने पर बेहतर पनपती है। ठंड सहने की क्षमता के कारण सर्दियों में हीटर की जरूरत कम ही पड़ती है, फिर भी हवा और नमी से बचाव जरूरी है। गर्म और उमस भरे इलाकों में, खासकर मानसून के दौरान, प्राथमिकता छाया और अच्छे वेंटिलेशन पर रहनी चाहिए।
| पैरामीटर | सुझाव |
|---|---|
| दड़बा फर्श जगह | प्रति पक्षी लगभग 4 वर्ग फुट (0.37 वर्ग मीटर) |
| बाड़ा / खुला मैदान | प्रति पक्षी कम से कम 8 से 10 वर्ग फुट (0.7 से 0.9 वर्ग मीटर) |
| बैठने की जगह | प्रति पक्षी लगभग 8 इंच (20 सेंटीमीटर) पर्च |
| अंडा-पेटी | हर 3 से 4 मुर्गियों पर एक पेटी |
| तापमान सहनशीलता | ठंड अच्छी तरह सहती है; लगभग 90 F (32 C) से ऊपर छाया चाहिए |
तैयारी की सूची
- सूखा, सीधी हवा से बचा दड़बा, बैठने की जगह से ऊपर वेंटिलेशन के साथ
- शिकारियों से सुरक्षित दीवारें, फर्श और बाड़ा, जिसमें जमीन में धंसा हुआ या एप्रन जाल शामिल हो
- फर्श से ऊपर उठी हुई बैठने की डंडियां
- दड़बे के शांत, कम रोशनी वाले हिस्से में अंडा-पेटी
- बारिश से बचे हुए साफ पानी और दाना-बर्तन
- बाड़े में छायादार धूल-स्नान की जगह
अंडे सेना और इनक्यूबेशन
बकाई के अंडे मानक इनक्यूबेशन में करीब 21 दिन में सेते हैं, और मुर्गियां अक्सर खुद बैठकर अच्छी तरह चूजे पालती हैं।
बकाई के अंडे करीब 21 दिन में सेते हैं, जो मुर्गियों के लिए सामान्य समय है। अंडे सेने का काम मुर्गी खुद बैठकर या इनक्यूबेटर में हो सकता है। बकाई मुर्गियां अक्सर सेने पर बैठ जाती हैं और अच्छी मां साबित होती हैं, इसलिए प्राकृतिक तरीका अक्सर अपनाया जा सकता है। इनक्यूबेटर में अंडे सेने के लिए तापमान और नमी स्थिर रखें और सेने से कुछ दिन पहले तक नियमित रूप से अंडे पलटें।
| पैरामीटर | मान |
|---|---|
| तापमान | फोर्स्ड-एयर इनक्यूबेटर में 99.5 F (37.5 C) |
| नमी | लगभग 45 से 55%, आखिरी 3 दिनों में बढ़ाकर 65 से 70% |
| दिन | करीब 21 दिन |
| पलटना | दिन 18 तक रोजाना कम से कम 3 से 5 बार, फिर बंद |
अंडे सेने के चरण
- साफ, सही आकार के अंडे चुनें और सेट करने से पहले 7 से 10 दिन से ज्यादा नहीं, नुकीला सिरा नीचे करके रखें
- अंडे रखने से पहले इनक्यूबेटर गर्म करें और तापमान व नमी स्थिर होने की पुष्टि करें
- अंडे रखें और पलटना शुरू करें, हर तरफ को चिह्नित करके पलटने का हिसाब रखें
- दिन 7 से 10 के आसपास कैंडलिंग करके विकास जांचें और खाली या अविकसित अंडे हटा दें
- दिन 18 पर पलटना बंद करें और आखिरी दिनों में नमी बढ़ाएं
- चूजों को इनक्यूबेटर में ही पूरी तरह सूखने दें, फिर गर्म ब्रूडर में ले जाएं
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बकाई मुर्गी से जुड़े आम सवालों में इसका आकार, स्वभाव, देखभाल की जरूरतें, आयु, उपयुक्तता और उपलब्धता शामिल हैं।
बकाई मुर्गी कितनी बड़ी होती है?
बकाई एक मध्यम आकार की दोहरे उपयोग वाली नस्ल है। मुर्गे का वजन करीब 9 पाउंड (4.1 किग्रा) और मुर्गी का करीब 6.5 पाउंड (2.9 किग्रा) होता है, शरीर सुडौल और मांसल होता है।
बकाई का स्वभाव कैसा होता है?
बकाई मिलनसार, शांत और सक्रिय होती है। यह इंसानों के साथ सहज रहती है, मिश्रित बाड़े में आमतौर पर शांतिपूर्ण रहती है, और कीड़े-मकोड़े व छोटे शिकार पकड़ने में माहिर मानी जाती है।
क्या बकाई की देखभाल आसान है?
हां। यह नस्ल मजबूत है और कम देखभाल मांगती है। इसे सूखा, हवादार दड़बा, चारा ढूंढने की जगह, और नियमित परजीवी व बाड़ा देखभाल चाहिए, कोई नस्ल-विशेष स्वास्थ्य जरूरत नहीं है।
बकाई मुर्गी कितने साल जीती है?
अच्छी देखभाल मिलने पर बकाई आमतौर पर 6 से 10 वर्ष जीती है।
क्या बकाई ठंडे इलाकों के लिए अच्छी है?
हां। इसकी मटर कलगी और कसे हुए पंख इसे कड़ी सर्दी के लिए उपयुक्त बनाते हैं और शीतदंश से बचाते हैं, यह गुण ओहायो में इसके शुरुआती विकास का ही मकसद था।
क्या बकाई मुर्गियां अच्छे अंडे देती हैं?
बकाई एक दोहरे उपयोग की नस्ल है, जिसे मांस और भूरे अंडे दोनों के लिए पाला जाता है। यह मध्यम से बड़े आकार के भूरे अंडे नियमित रूप से देती है और साथ ही मांसल शरीर भी देती है।
क्या बकाई मुर्गियां दुर्लभ हैं?
बीसवीं सदी के मध्य में व्यावसायिक उत्पादन बढ़ने के साथ बकाई दुर्लभ हो गई थी। परंपरागत पोल्ट्री पालकों की मदद से यह नस्ल फिर से उबरी है, इसलिए पक्षी और सेने योग्य अंडे प्रजनकों के जरिए मिल जाते हैं, हालांकि ये आम नस्लों जितने सुलभ नहीं हैं।
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