ऑस्ट्रालॉर्प
ऑस्ट्रालॉर्प एक मिलनसार ऑस्ट्रेलियाई नस्ल है, जो अपनी रिकॉर्ड-स्थापित अंडा देने की क्षमता और शांत, कोमल स्वभाव के लिए विश्व-प्रसिद्ध है।
- Size
- मध्यम
- Lifespan
- 6–10 years
- Origin
- ऑस्ट्रेलिया
- Temperament
- मित्रवत
- Standard colors
- काला, सफ़ेद, और नीला and 2 more
Characteristics
ऑस्ट्रालॉर्प colors and patterns
What each club's breed standard says about every ऑस्ट्रालॉर्प color and pattern. Point at a ruling to see the club's own wording.
Breed standards describe the ऑस्ट्रालॉर्प in काला, सफ़ेद, नीला, लैवेंडर, और डन. Standard patterns: एकरंगा, किनारीदार, और स्प्लैश.
| Color or pattern | APA | PCGB | EE | ABA |
|---|---|---|---|---|
| काला | मानक (“Black”) | मानक (“The black”) | मानक (“schwarz”) | मानक (“Black”) |
| सफ़ेद | No ruling | मानक (“The white”) | मानक (“weiß; splash”) | No ruling |
| नीला | No ruling | मानक (“The blue”) | मानक (“blau-gesäumt; splash”) | No ruling |
| लैवेंडर | No ruling | No ruling | मानक (“perlgrau”) | No ruling |
| डन | No ruling | No ruling | मानक (“dun”) | No ruling |
| Patterns | ||||
| एकरंगा | मानक (“Black”) | मानक (“The black; The white”) | मानक (“schwarz; weiß; dun; perlgrau”) | मानक (“Black”) |
| किनारीदार | No ruling | मानक (“The blue”) | मानक (“blau-gesäumt”) | No ruling |
| स्प्लैश | No ruling | No ruling | मानक (“splash”) | No ruling |
| Color or pattern | PCGB |
|---|---|
| सफ़ेद | मानक (“Skin white”) |
| Color or pattern | PCGB |
|---|---|
| काला | मानक (“Eyes black or dark brown iris, black preferred”) |
| गहरा भूरा | मानक (“Eyes black or dark brown iris, black preferred”) |
| मोती | दोष (“Yellow or pearl-coloured eyes”) |
| लाल | दोष (“Red eyes”) |
| पीला | दोष (“Yellow or pearl-coloured eyes”) |
| Color or pattern | PCGB |
|---|---|
| काला | मानक (“Beak black Beak blue or black”) |
| स्लेट-नीला | मानक (“Beak black Beak blue or black”) |
| Color or pattern | PCGB |
|---|---|
| काला | मानक (“Legs and feet black with white soles”) |
| सफ़ेद | दोष (“white legs”) |
| स्लेट-नीला | No ruling |
| Color or pattern | PCGB |
|---|---|
| लाल | मानक (“Face, comb, ear-lobes and wattles bright red”) |
| Color or pattern | PCGB |
|---|---|
| लाल | मानक (“bright red”) |
| सफ़ेद | दोष (“Permanent white in ear-lobes”) |
| Color or pattern | PCGB |
|---|---|
| भूरा | मानक (“Egg colour: Brown”) |
| हल्का भूरा | No ruling |
काला
छींटेदार
नीला
लैवेंडर
What the rulings mean
- मानक
- Described by the club's breed standard.
- दोष
- Named by the club's breed standard as a fault: the animal can be shown but is penalized.
Color changes
How a ऑस्ट्रालॉर्प's colors can change over its life.
कालाchanges toपट्टीदार
पंख · उम्र के साथ · males only
भूराchanges toहल्का भूरा
अंडे का छिलका · क्रमिक · from 25 weeks · females only
Sources
Each ruling comes from the club's published breed standard or color list.
ऑस्ट्रालॉर्प के बारे में
ऑस्ट्रालॉर्प एक मध्यम आकार की ऑस्ट्रेलियाई मुर्गी नस्ल है, जो भारी अंडा उत्पादन और शांत, मिलनसार स्वभाव के लिए जानी जाती है और घरेलू बाड़ों के लिए उपयुक्त है।
ऑस्ट्रालॉर्प एक दोहरे उपयोग वाली मुर्गी नस्ल है जिसे ऑस्ट्रेलिया में विकसित किया गया था और जो सबसे पहले भूरे अंडे देने के लिए जानी जाती है। मुर्गियाँ लगातार और भरोसेमंद ढंग से अंडे देती हैं, और इस नस्ल ने बीसवीं सदी की शुरुआत में अंडा उत्पादन प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनाई। इसका नाम "ऑस्ट्रेलियन ऑर्पिंगटन" का संक्षिप्त रूप है, जो उस अंग्रेज़ी नस्ल की ओर इशारा करता है जिससे इसे तैयार किया गया।
पक्षी मध्यम आकार और मज़बूत बनावट के होते हैं, इनकी चाल शांत रहती है और पंख सटे हुए तथा चमकदार होते हैं। सबसे आम किस्म पूरी तरह काली होती है, जिस पर धूप में हरे भृंग जैसी चमक दिखाई देती है। मुर्गे का वज़न आमतौर पर 3.6 से 3.9 किलोग्राम और मुर्गी का वज़न 2.7 से 3.2 किलोग्राम के बीच रहता है, यानी ये भारी तो हैं पर संभालने में मुश्किल नहीं।
स्वभाव इस नस्ल की सबसे बड़ी खूबियों में से एक है। ऑस्ट्रालॉर्प मिलनसार, नरम स्वभाव के और शांत पक्षी हैं, इसलिए इन्हें संभालना आसान होता है और यह परिवारों तथा पहली बार मुर्गीपालन शुरू करने वालों के लिए समझदारी भरा विकल्प है। ये बाड़े में बंद रहकर भी ठीक रहते हैं और खुला छोड़ने पर खुशी से चारा भी खोजते हैं।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मूल स्थान | ऑस्ट्रेलिया |
| आकार | मध्यम |
| जीवनकाल | 6 से 10 वर्ष |
| समूह / भूमिका | दोहरे उपयोग की, मुख्यतः अंडा उत्पादन के लिए |
| किसके लिए उपयुक्त | परिवार, नए पालक, मिश्रित घरेलू झुंड |
यह किनके लिए उपयुक्त है
ऑस्ट्रालॉर्प उन पालकों के लिए सही है जो एक शांत, बिना झंझट वाले पक्षी से भूरे अंडों की भरोसेमंद आपूर्ति चाहते हैं। यह उन शहरी बैकयार्ड में भी अच्छी तरह ढल जाती है जहाँ नरम स्वभाव मायने रखता है, और यह कई हल्की लेयर नस्लों की तुलना में ठंड बेहतर सहन करती है। जो लोग दिखावटी शो बर्ड या जल्दी तैयार होने वाली मांस नस्ल चाहते हैं, वे कहीं और देख सकते हैं, लेकिन लगातार अंडों और सहज स्वभाव के मामले में इसे पीछे छोड़ना मुश्किल है।
इतिहास और उत्पत्ति
ऑस्ट्रालॉर्प को बीसवीं सदी की शुरुआत में ऑस्ट्रेलिया में आयातित ऑर्पिंगटन नस्ल से विकसित किया गया था, और 1920 के दशक की रिकॉर्ड तोड़ने वाली अंडा प्रतियोगिताओं के बाद इसे मानकीकृत किया गया।
इस नस्ल का सिलसिला उन ब्लैक ऑर्पिंगटन मुर्गियों से जुड़ता है जिन्हें उन्नीसवीं सदी के अंत और बीसवीं सदी की शुरुआत में इंग्लैंड से ऑस्ट्रेलिया लाया गया था। ऑस्ट्रेलियाई पालकों ने इस नस्ल के आकार और मज़बूती को बनाए रखते हुए इसकी अंडा देने की क्षमता सुधारने का लक्ष्य रखा, और शो के मानकों की बजाय उत्पादन को प्राथमिकता दी।
1920 के दशक में ऑस्ट्रालॉर्प मुर्गियों ने अंडा उत्पादन प्रतियोगिताओं में अंतरराष्ट्रीय ध्यान खींचा। यह नस्ल एक साल में बड़ी संख्या में अंडे देने के लिए जानी जाने लगी, और इन प्रतियोगिताओं के नतीजों ने इसे एक प्रमुख उपयोगी लेयर नस्ल के रूप में स्थापित कर दिया।
"ऑस्ट्रालॉर्प" नाम का इस्तेमाल ऑस्ट्रेलियाई उपयोगी किस्म को मूल अंग्रेज़ी ऑर्पिंगटन से अलग पहचानने के लिए शुरू हुआ। इसे आमतौर पर "ऑस्ट्रेलियन" और "ऑर्पिंगटन" के मेल के रूप में समझा जाता है, जो नस्ल के विकास वाले देश और मूल नस्ल दोनों की ओर इशारा करता है।
ऑस्ट्रेलिया से यह नस्ल दूसरे देशों में फैली, जहाँ इसे पोल्ट्री मानकों में शामिल किया गया और इसे काम की लेयर तथा प्रदर्शनी पक्षी दोनों रूपों में पाला जाने लगा। काली किस्म आज भी सबसे ज़्यादा जानी जाती है, हालाँकि कुछ इलाकों में अन्य रंगों की किस्में भी मिलती हैं।
रूप रंग
ऑस्ट्रालॉर्प मध्यम आकार की, गहरे शरीर वाली मुर्गी है जिसके पंख मुलायम और सटे हुए होते हैं, ज़्यादातर पूरी तरह काली और हरी चमक वाली, एक लाल सिंगल कलगी और गहरी आँखों के साथ।
ऑस्ट्रालॉर्प का शरीर गोल और गहरा होता है और यह मध्यम लंबाई के पैरों पर टिका रहता है, जिससे इसकी बनावट भारी लेकिन संतुलित दिखती है। पंख मुलायम और सटे हुए होते हैं, ढीले या फूले हुए नहीं। सिंगल कलगी, गलमुच्छे (वॉटल) और कर्णपालि (इयरलोब) लाल रंग के होते हैं, और कलगी के दांत स्पष्ट रूप से उभरे होते हैं। कुल मिलाकर यह एक शांत, मज़बूत उपयोगी पक्षी जैसी छाप छोड़ती है।
| गुण | मानक |
|---|---|
| वज़न (मुर्गा) | लगभग 3.6 से 3.9 किलोग्राम |
| वज़न (मुर्गी) | लगभग 2.7 से 3.2 किलोग्राम |
| पंख | मुलायम, सटे हुए, चमकदार |
| रंग | काला (सबसे आम); कुछ मानकों में नीला और सफेद भी |
| आँखें | गहरा भूरा से काला |
पंख और रंग
क्लासिक ऑस्ट्रालॉर्प पूरी तरह काली होती है, और सीधी धूप में पीठ और सैडल के पंखों पर हरे भृंग जैसी चमक दिखाई देती है। त्वचा और पैरों के तलवे सफेद होते हैं, और चोंच गहरे रंग की होती है। कुछ पोल्ट्री मानकों में नीली और सफेद किस्में भी मान्य हैं, पर काली किस्म ही सबसे ज़्यादा पाली जाती है। पैर साफ (बिना पंख वाले) और गहरे स्लेटी से काले रंग के होते हैं।
स्वभाव और व्यवहार
ऑस्ट्रालॉर्प शांत, मिलनसार और नरम स्वभाव के पक्षी हैं, जिन्हें संभालना आसान है, जो मिश्रित झुंड में घुलमिल जाते हैं और बाड़े व खुले दोनों तरह के माहौल में ढल जाते हैं।
ऑस्ट्रालॉर्प का स्वभाव नरम और शांत होता है। ये सबसे ज़्यादा सरल स्वभाव वाली मुर्गी नस्लों में गिनी जाती हैं, जिससे इन्हें उठाना, जाँचना और बच्चों के आसपास रखना आसान होता है। कई पक्षी वाकई पालतू जैसे हो जाते हैं और खासकर खाने की उम्मीद में खुद पालक के पास चले आते हैं।
अजनबियों के सामने यह नस्ल घबराने की बजाय बेफिक्र बनी रहती है, और दूसरी मुर्गियों के बीच यह दबदबे के क्रम (पेकिंग ऑर्डर) में बीच का स्थान लेकर बिना झगड़े के रहती है। मिश्रित झुंड आमतौर पर ऑस्ट्रालॉर्प को आसानी से अपना लेते हैं, और यह छोटे पक्षियों को शायद ही कभी तंग करती है। मुर्गे आमतौर पर स्थिर स्वभाव के होते हैं, हालाँकि हर पक्षी का मिज़ाज अलग हो सकता है।
यह नस्ल खास शोर मचाने वाली नहीं है। मुर्गियाँ अंडा देने के बाद सामान्य आवाज़ें निकालती हैं, पर बाकी समय शांत रहती हैं, जो शहरी बस्तियों में रहने के लिए मददगार है। जगह मिलने पर ऑस्ट्रालॉर्प सक्रिय रूप से चारा खोजती हैं, फिर भी बाड़े या दड़बे में बंद रहने पर चुपचाप बस जाती हैं।
| गुण | रेटिंग |
|---|---|
| स्नेह | 4 |
| ऊर्जा | 3 |
| प्रशिक्षण क्षमता | 3 |
| आवाज़ | 2 |
| पंख झड़ना | 3 |
देखभाल और संवारना
ऑस्ट्रालॉर्प को कम देखभाल की ज़रूरत होती है, बस साफ आवास, रोज़ाना चारा पानी, घूमने फिरने की जगह और परजीवियों व सेहत की नियमित जाँच चाहिए।
ऑस्ट्रालॉर्प मज़बूत और माँग न करने वाला पक्षी है। इसकी देखभाल का मुख्य आधार साफ, सूखा आवास, चारा पानी की स्थिर आपूर्ति और परजीवियों की नियमित जाँच है। सटे हुए पंखों को किसी खास संवारने की ज़रूरत नहीं पड़ती, हालाँकि पक्षियों को खुद को साफ रखने का साधन मिलना चाहिए।
संवारना
- सूखी धूल स्नान की जगह दें; मुर्गियाँ धूल में लोटकर खुद को साफ करती हैं, जिससे किलनी और जुओं पर नियंत्रण रहता है।
- हर कुछ हफ्तों में वेंट के पंख और निचले हिस्से की जाँच करें ताकि बाहरी परजीवियों के लक्षण पकड़ में आएँ।
- ज़रूरत पड़ने पर ही बढ़े हुए नाखून या चोंच काटें, सक्रिय रूप से चारा खोजने वाले पक्षियों में यह कम ही होता है।
- नियमित रूप से संभालते समय पैरों और टांगों में स्केली लेग माइट या चोट के निशान देखें।
व्यायाम
- रोज़ाना दड़बे के बाहर टहलने या निगरानी में खुला छोड़ने का मौका दें ताकि पक्षी चारा खोज सकें।
- हर पक्षी के लिए कम से कम 1 वर्ग मीटर रन की जगह रखें, संभव हो तो और ज़्यादा।
- अलग अलग ऊँचाई पर बैठने की डंडियाँ लगाएँ ताकि पक्षी स्वाभाविक रूप से बैठ और घूम सकें।
- स्वाभाविक खुरचने और चलने फिरने को बढ़ावा देने के लिए चारा या हरी पत्तियाँ बिखेर दें।
माहौल
घने पंखों के कारण ऑस्ट्रालॉर्प ठंड अच्छी तरह सहन कर लेती है, पर गर्म मौसम में इसे छाया और हवा की ज़रूरत होती है। दड़बे को सूखा और हवा के झोंकों से बचाकर रखें, और बैठने की जगह के ऊपर अच्छा हवा का बहाव सुनिश्चित करें। अंडे देने के लिए छायादार घोंसले की जगह दें और रात में मज़बूत बाड़ और बंद होने वाले दड़बे से झुंड को शिकारियों से बचाएँ।
पोषण और आहार
ऑस्ट्रालॉर्प को जीवन चरण के हिसाब से पूरा पोल्ट्री आहार चाहिए, मुर्गियों के लिए लेयर फीड, हमेशा ताज़ा पानी, ग्रिट और मज़बूत छिलके के लिए कैल्शियम।
आहार का आधार एक संपूर्ण व्यावसायिक पोल्ट्री फीड होना चाहिए। उम्र के साथ प्रोटीन का स्तर और मिश्रण बदलता है: चूजों को स्टार्टर क्रम्बल चाहिए, बढ़ते पक्षियों को ग्रोअर राशन, और अंडे देने वाली मुर्गियों को कैल्शियम मिला हुआ लेयर फीड। ताज़ा पानी हर समय उपलब्ध होना चाहिए, और अघुलनशील ग्रिट उन पक्षियों को पौधों का चारा पचाने में मदद करता है जो खुद चारा खोजते हैं।
| जीवन चरण | प्रतिदिन मात्रा | बार |
|---|---|---|
| चूजा (0 से 8 हफ्ते) | इच्छानुसार स्टार्टर क्रम्बल | हमेशा उपलब्ध |
| बढ़ता पक्षी (8 से 18 हफ्ते) | इच्छानुसार ग्रोअर फीड | हमेशा उपलब्ध |
| अंडे देने वाली मुर्गी | लगभग 120 से 150 ग्राम लेयर फीड | 1 से 2 बार, साथ में इच्छानुसार |
ट्रीट और सप्लीमेंट
ट्रीट कुल आहार का लगभग 10 प्रतिशत से कम रहना चाहिए ताकि आहार का संतुलन न बिगड़े। पत्तेदार साग, सब्ज़ियों के बचे हुए टुकड़े, और थोड़ी मात्रा में अनाज या मीलवर्म उपयुक्त विकल्प हैं। अंडे देने वाली मुर्गियों को मज़बूत छिलके के लिए अलग से कुचला हुआ सीप का खोल या कैल्शियम का कोई स्रोत दें, और जहाँ पक्षी संपूर्ण फीड के अलावा कुछ और भी खाते हों वहाँ ग्रिट दें।
सेहत और जीवनकाल
ऑस्ट्रालॉर्प एक मज़बूत, लंबी उम्र वाली नस्ल है जिसका सामान्य जीवनकाल 6 से 10 वर्ष है, इसे मुख्यतः आम पोल्ट्री परजीवियों और श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा रहता है।
अच्छी देखभाल में ऑस्ट्रालॉर्प आमतौर पर स्वस्थ और मज़बूत रहती है, इसका सामान्य जीवनकाल 6 से 10 वर्ष है। इसमें कोई नस्ल विशेष दोष नहीं देखा जाता, और ज़्यादातर सेहत समस्याएँ वही आम पोल्ट्री समस्याएँ हैं जो बैकयार्ड झुंडों में देखी जाती हैं। मुर्गी के उत्पादक वर्षों में लगातार अंडे देने से बड़ी उम्र में प्रजनन संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।
| समस्या | लक्षण | टिप्पणी |
|---|---|---|
| बाहरी परजीवी (किलनी, जुएँ) | खुजली, पीली कलगी, पंख झड़ना | धूल स्नान और जाँच से नियंत्रण करें |
| आंतरिक कीड़े | वज़न घटना, पतला मल | नियमित मल जाँच और सलाह अनुसार कृमिनाशक दवा |
| श्वसन संक्रमण | छींक, नाक से स्राव, घरघराहट | हवा का बहाव बेहतर करें; बीमार पक्षियों को अलग रखें |
| प्रजनन संबंधी समस्याएँ (बड़ी उम्र की मुर्गियाँ) | पेट में सूजन, अंडा उत्पादन में गिरावट | उम्र के साथ भारी अंडा देने वाली मुर्गियों में ज़्यादा आम |
रोकथाम की देखभाल
- दड़बे को साफ, सूखा और हवादार रखें।
- बाहरी परजीवियों को रोकने के लिए धूल स्नान की जगह दें।
- नियमित परजीवी जाँच कराएँ और पशु चिकित्सक की सलाह पर कृमिनाशक दवा दें।
- नए पक्षियों को झुंड में मिलाने से पहले क्वारंटीन में रखें।
- अंडे देने वाली मुर्गियों के लिए संतुलित आहार और कैल्शियम दें।
आवास और रहने की जगह
ऑस्ट्रालॉर्प को सुरक्षित, सूखे, हवादार दड़बे के साथ बैठने की डंडियाँ और घोंसले वाले बक्से चाहिए, साथ ही बाहर घूमने की जगह भी, और यह ठंडी जलवायु अच्छी तरह सहन करती है।
ऑस्ट्रालॉर्प ज़्यादातर बैकयार्ड सेटअप में ढल जाती है, बस आवास सूखा, सुरक्षित और हवादार होना चाहिए। घने पंखों के कारण यह ठंड अच्छी तरह सहन करती है, और गर्म मौसम में इसे छाया, हवा का बहाव और लगातार पानी चाहिए। रात में बंद होने वाला शिकारी रोधी दड़बा ज़रूरी है, साथ ही दिन में चारा खोजने के लिए रन या खुली जगह होनी चाहिए।
| माप | सुझाव |
|---|---|
| दड़बे का फर्श क्षेत्र | प्रति पक्षी लगभग 0.3 से 0.4 वर्ग मीटर |
| रन की जगह | प्रति पक्षी कम से कम 1 वर्ग मीटर, ज़्यादा हो तो बेहतर |
| बैठने की डंडी की लंबाई | प्रति पक्षी लगभग 20 से 25 सेंटीमीटर |
| घोंसले के बक्से | हर 3 से 4 मुर्गियों के लिए 1 बक्सा |
| हवा का बहाव | ऊँचाई पर, बैठने की जगह से ऊपर, बिना सीधी हवा के झोंकों के |
सेटअप की जाँच सूची
- लॉक वाले दरवाज़े और शिकारी रोधी बाड़ के साथ मज़बूत दड़बा।
- घोंसले के बक्सों के ऊपर ऊँचाई पर लगी बैठने की डंडियाँ।
- शांत कोने में साफ, बिस्तर वाले घोंसले के बक्से।
- फर्श पर सूखा बिस्तर, जिसे नियमित रूप से बदला जाए।
- गर्म दिनों के लिए रन में छाया और ताज़ा पानी।
- बैठने की जगह पर सीधी हवा के झोंकों के बिना अच्छा ऊपरी हवा का बहाव।
अंडे से चूज़े निकालना और इनक्यूबेशन
ऑस्ट्रालॉर्प के अंडे लगभग 37.5 डिग्री सेल्सियस पर करीब 21 दिन में फूटते हैं, जिसके लिए नियंत्रित नमी, नियमित पलटाई और फूटने से पहले ज़्यादा नमी वाला लॉकडाउन चाहिए।
ऑस्ट्रालॉर्प के अंडे मुर्गी के सामान्य इनक्यूबेशन पैटर्न का पालन करते हैं और लगभग 21 दिन में फूटते हैं। अंडों को ब्रूडी मुर्गी के नीचे या इनक्यूबेटर में रखा जा सकता है। इस नस्ल की मुर्गियाँ कभी कभी ब्रूडी होती हैं और ध्यान रखने वाली माँ साबित होती हैं, हालाँकि यह प्रवृत्ति कुछ भारी नस्लों जितनी तेज़ नहीं होती। इनक्यूबेटर में अंडे फुड़वाने के लिए स्थिर तापमान, नियंत्रित नमी और आखिरी दिनों तक नियमित पलटाई ज़रूरी है।
| माप | मान |
|---|---|
| तापमान | लगभग 37.5 डिग्री सेल्सियस (99.5 डिग्री फ़ारेनहाइट), फोर्स्ड एयर |
| नमी | 1 से 18 दिन तक लगभग 45 से 55 प्रतिशत, फिर 65 से 75 प्रतिशत |
| दिन | लगभग 21 |
| पलटाई | 18वें दिन तक रोज़ कम से कम 3 से 5 बार |
अंडे सेने के चरण
- साफ, अच्छी आकृति वाले अंडे चुनें और सेने से पहले उन्हें नुकीले सिरे को नीचे रखकर रखें।
- अंडे रखने से पहले इनक्यूबेटर का तापमान और नमी स्थिर कर लें।
- 18वें दिन तक अंडों को दिन में कम से कम तीन बार पलटें।
- विकास जाँचने के लिए लगभग 7वें से 10वें दिन कैंडलिंग करें और साफ यानी बिना विकास वाले अंडे हटा दें।
- 18वें दिन पलटाई बंद करें, नमी बढ़ाएँ और लॉकडाउन शुरू करें।
- फूटने के दौरान ढक्कन बंद रखें और चूज़ों को ब्रूडर में ले जाने से पहले उन्हें सूखने दें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ऑस्ट्रालॉर्प से जुड़े आम सवालों में इसका आकार, स्वभाव, देखभाल का स्तर, जीवनकाल, नए पालकों के लिए उपयुक्तता और उपलब्धता शामिल है।
ऑस्ट्रालॉर्प कितनी बड़ी होती है?
ऑस्ट्रालॉर्प मध्यम से बड़े आकार की मुर्गी है। मुर्गे का वज़न लगभग 3.6 से 3.9 किलोग्राम और मुर्गी का वज़न लगभग 2.7 से 3.2 किलोग्राम होता है, और शरीर गहरा व गोल होता है।
ऑस्ट्रालॉर्प का स्वभाव कैसा होता है?
यह नस्ल शांत, मिलनसार, नरम स्वभाव और सरल है। पक्षियों को संभालना आसान होता है, ये मिश्रित झुंड में अच्छी तरह घुलमिल जाते हैं, और कई पालकों के आसपास पालतू जैसे हो जाते हैं।
क्या ऑस्ट्रालॉर्प की देखभाल मुश्किल है?
नहीं। यह मज़बूत और कम देखभाल वाली नस्ल है, इसे बस साफ सूखा आवास, संपूर्ण आहार, ताज़ा पानी, चारा खोजने की जगह और नियमित परजीवी जाँच चाहिए।
ऑस्ट्रालॉर्प कितने साल जीती है?
अच्छी देखभाल में इसका सामान्य जीवनकाल 6 से 10 वर्ष है, हालाँकि अंडा उत्पादन इस अवधि के खत्म होने से काफी पहले घटने लगता है।
क्या ऑस्ट्रालॉर्प नए पालकों के लिए अच्छी है?
हाँ। इसका शांत स्वभाव, भरोसेमंद अंडा उत्पादन और मज़बूती इसे पहली बार मुर्गी पालने वालों और परिवारों के लिए सबसे आसान नस्लों में से एक बनाती है।
क्या ऑस्ट्रालॉर्प आसानी से मिल जाती है?
काली ऑस्ट्रालॉर्प व्यापक रूप से पाली जाती है और कई देशों में हैचरी और ब्रीडरों के पास आसानी से उपलब्ध होती है, इसलिए चूज़े या हैचिंग अंडे लेना आमतौर पर आसान होता है।
क्या ऑस्ट्रालॉर्प ठंडे मौसम में रह सकती है?
हाँ। इसके घने पंख इसे ठंडी जलवायु सहने में मदद करते हैं, फिर भी इसे सूखा, हवा के झोंकों से बचा हुआ दड़बा और गर्म मौसम में छाया व पानी चाहिए।
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