United Pet Club
मवेशी

ग्वेर्नसी

गर्नसी एक शांत स्वभाव वाली सुनहरी-भूरी डेयरी नस्ल है, जो अपने शांत मिज़ाज और सुनहरे, बीटा-कैरोटीन से भरपूर दूध के लिए सराही जाती है।

Size
मध्यम
Lifespan
12–15 years
Origin
यूनाइटेड किंगडम
Temperament
सीधा-सादा
Standard colors
सफ़ेद और फ़ॉन
Key Traits
सीधा-सादाशांतकोमलसुस्वभावी

Characteristics

Energy Level2
Trainability2
Good With Kids3
Good With Pets2
Grooming Needs2

ग्वेर्नसी colors and patterns

What each club's breed standard says about every ग्वेर्नसी color and pattern. Point at a ruling to see the club's own wording.

Breed standards describe the ग्वेर्नसी in सफ़ेद और फ़ॉन. Standard patterns: चितकबरा.

फ़र: rulings by club
Color or patternPDCA
सफ़ेदमानक (“white markings”)
फ़ॉनमानक (“shade of fawn”)
सुनहराNo ruling
Patterns
चितकबरामानक (“fawn and white markings throughout clearly defined”)
त्वचा और शल्क: rulings by club
Color or pattern
पीला

What the rulings mean

मानक
Described by the club's breed standard.

Color changes

How a ग्वेर्नसी's colors can change over its life.

  • फ़ॉनchanges toस्लेटी

    फ़र · उम्र के साथ · from 0 to 35 weeks

Sources

Each ruling comes from the club's published breed standard or color list.

गर्नज़ी नस्ल का परिचय

गर्नज़ी एक मध्यम आकार की डेयरी नस्ल है, जो ब्रिटिश चैनल द्वीप गर्नज़ी से आती है और अपने शांत स्वभाव तथा बीटा-कैरोटीन से भरपूर सुनहरे दूध के लिए जानी जाती है।

गर्नज़ी गोवंश की एक डेयरी नस्ल है, जिसका नाम नॉरमंडी के पास स्थित चैनल द्वीप गर्नज़ी से पड़ा है। यह मध्यम आकार का पशु है, जिसका रंग हल्के सुनहरे से लेकर गहरे लाल-भूरे तक होता है, शरीर पर सफेद धब्बे भी पाए जाते हैं। यह नस्ल मुख्य रूप से दूध उत्पादन के लिए पाली जाती है, और इसके दूध का सुनहरा रंग बीटा-कैरोटीन की अधिक मात्रा के कारण होता है।

गर्नज़ी गाय चारे को दूध में बदलने में बहुत कुशल मानी जाती है, और इसका शरीर कई अन्य डेयरी नस्लों की तुलना में छोटा होता है। एक वयस्क गाय का वज़न आमतौर पर 450 से 500 किलोग्राम के बीच रहता है, जो होल्स्टीन से कम है, इसलिए यह नस्ल कम चारा खाकर भी अच्छी मात्रा में दूध देती है, जिसमें वसा और प्रोटीन दोनों की मात्रा अधिक होती है। यही गुण इसे चरागाह-आधारित डेयरी व्यवस्था के लिए व्यावहारिक विकल्प बनाता है।

यह नस्ल अपने सौम्य और मिलनसार स्वभाव के लिए भी जानी जाती है, जिसके कारण इसे संभालना और नियमित रूप से दुहना आसान रहता है। गर्नज़ी गायें व्यावसायिक डेयरी फार्मों, छोटे कृषि फार्मों और संरक्षण झुंडों में पाली जाती हैं, और कृषि प्रदर्शनियों में भी दिखाई जाती हैं जहाँ नस्ल के मानकों के आधार पर उनका मूल्यांकन होता है।

गर्नज़ी की मुख्य जानकारी एक नज़र में
विशेषताजानकारी
उद्गमगर्नज़ी द्वीप, यूनाइटेड किंगडम
आकारमध्यम (गाय का वज़न लगभग 450 से 500 किलोग्राम)
आयु12 से 15 वर्ष
समूह/भूमिकाडेयरी गोवंश
उपयुक्त वातावरणचरागाह प्रणाली, शांत स्वभाव के पालक, छोटे फार्म

यह नस्ल किसके लिए उपयुक्त है

जो डेयरी पालक बड़े आकार के पशु से अधिकतम मात्रा में दूध लेने के बजाय मध्यम आकार के कुशल पशु से बेहतर गुणवत्ता वाला दूध चाहते हैं, उनके लिए गर्नज़ी एक अच्छा विकल्प है। इसका शांत स्वभाव छोटे फार्मों और पारिवारिक व्यवसायों के लिए इसे संभालना आसान बनाता है। पालकों को चराई के लिए ज़मीन, दुहने की व्यवस्था और हर दिन दुधारू गाय की देखभाल के लिए ज़रूरी समय देने की तैयारी रखनी चाहिए।

इतिहास और उद्गम

गर्नज़ी नस्ल फ्रांसीसी मुख्य भूमि की गायों से गर्नज़ी द्वीप पर विकसित हुई, और द्वीप के अलगाव ने इसे एक अलग डेयरी नस्ल के रूप में ढाला।

गर्नज़ी नस्ल की उत्पत्ति इंग्लिश चैनल में स्थित गर्नज़ी द्वीप से हुई, जो फ्रांस के नॉरमंडी क्षेत्र के नज़दीक चैनल द्वीपों में से एक है। माना जाता है कि यह नस्ल मुख्य रूप से नज़दीकी फ्रांसीसी मुख्य भूमि से लाए गए पशुओं से विकसित हुई, जिनमें नॉर्मन और ब्रेटन क्षेत्रों से जुड़ी नस्लें भी शामिल थीं। समय के साथ इन पशुओं को द्वीप पर पालकर एक पहचान योग्य एकल नस्ल में ढाला गया।

द्वीप का भौगोलिक अलगाव इस नस्ल के स्वरूप को गढ़ने में बड़ी भूमिका निभाता है। लंबे समय तक गर्नज़ी में जीवित पशुओं के आयात पर सख़्त पाबंदी रही, जिससे यहाँ का झुंड मुख्य भूमि और अन्य जगहों की नस्लों से आनुवंशिक रूप से अलग बना रहा। इसी बंद झुंड की स्थिति के चलते सुनहरे-भूरे रंग और डेयरी गुण स्थायी रूप से नस्ल में स्थापित हो सके।

उन्नीसवीं सदी से गर्नज़ी गोवंश का निर्यात बढ़ती संख्या में होने लगा, और यह उत्तरी अमेरिका सहित दुनिया के कई हिस्सों में पहुँचा, जहाँ डेयरी पालक इस नस्ल के गाढ़े दूध को पाना चाहते थे। झुंड के रिकॉर्ड रखने और नस्ल मानकों को बनाए रखने के लिए उन क्षेत्रों में नस्ल संगठन स्थापित किए गए जहाँ गर्नज़ी पाली जाती थी।

बीसवीं सदी में गर्नज़ी एक मान्यता प्राप्त व्यावसायिक डेयरी नस्ल बनी रही, हालाँकि इसका मुकाबला होल्स्टीन जैसी अधिक दूध देने वाली नस्लों से रहा। आज इसे व्यावसायिक दूध उत्पादन के साथ-साथ एक संरक्षण नस्ल के रूप में भी पाला जाता है, और नस्ल संगठन इसकी वंशावली की सुरक्षा के लिए झुंड-पंजी बनाए रखते हैं।

रूप-रंग और नस्ल मानक

गर्नज़ी मध्यम आकार की सुनहरी-सफेद डेयरी गाय है, जिसका शरीर पतला और डेयरी बनावट वाला होता है, और इसका नाम इसके रंग तथा दूध के सुनहरे रंग से जुड़ा है।

गर्नज़ी का शरीर डेयरी नस्लों की तरह पच्चर के आकार का और कोणीय होता है, जिसमें थन अच्छी तरह विकसित होता है और हड्डियाँ मांस पशुओं जैसी भारी मांसपेशियों की बजाय पतली होती हैं। इसका रंग हल्के सुनहरे से लेकर गहरे लाल-भूरे तक होता है, और शरीर, टांगों तथा चेहरे पर सफेद धब्बे पाए जाते हैं। त्वचा पर अक्सर पीलापन दिखता है, जो थूथन और आँखों के आसपास साफ नज़र आता है।

यह नस्ल आकार में मध्यम होती है, होल्स्टीन से छोटी लेकिन अपने ढांचे के हिसाब से मज़बूत बनावट वाली। परंपरागत पशुओं में सींग आगे की ओर मुड़े हुए होते हैं, हालाँकि कई झुंडों में संभालना आसान बनाने के लिए सींग हटा दिए जाते हैं या बिना सींग वाली नस्ल तैयार की जाती है।

गर्नज़ी नस्ल मानक
गुणविवरण
ऊँचाईकंधे तक गाय की ऊँचाई लगभग 130 से 140 सेंटीमीटर
वज़नगाय का वज़न लगभग 450 से 500 किलोग्राम; सांड का वज़न लगभग 600 से 750 किलोग्राम
बालछोटे और मुलायम बाल
रंगसुनहरे से लाल-भूरे रंग तक, सफेद धब्बों सहित
आँखेंगहरे रंग की आँखें, पतले सिर पर, त्वचा में पीला रंगद्रव्य

रंग-रूप

गर्नज़ी की सबसे खास पहचान इसका सुनहरा-सफेद रंग है, जो इसकी त्वचा और दूध के सुनहरे रंग से मेल खाता है। सुनहरा रंग हर पशु में अलग होता है, कहीं हल्का मलाईदार सुनहरा तो कहीं गहरा लाल-भूरा। पेट के निचले हिस्से, टांगों और चेहरे पर सफेद धब्बे आम हैं। त्वचा में मौजूद पीला रंगद्रव्य उस बीटा-कैरोटीन को दर्शाता है जो इस नस्ल में पाया जाता है, वही तत्व गर्नज़ी के दूध को सुनहरा रंग देता है।

स्वभाव और व्यवहार

गर्नज़ी का स्वभाव शांत, सौम्य और मिलनसार होता है, जिसके कारण यह सबसे आसानी से संभाली जाने वाली डेयरी नस्लों में गिनी जाती है।

गर्नज़ी अपने कोमल और संतुलित स्वभाव के लिए जानी जाती है। यह नस्ल शांत, सौम्य और मिलनसार होती है, जिससे रोज़ की देखभाल, हांकना और दुहना, पशु और पालक दोनों के लिए कम तनावपूर्ण रहता है। इस स्वभाव की गायें जल्दी दिनचर्या में ढल जाती हैं और स्थिर, हल्के हाथ वाले संभालने के तरीके पर अच्छी तरह प्रतिक्रिया देती हैं।

झुंड के भीतर गर्नज़ी गायें आमतौर पर शांत और मिलनसार रहती हैं, और गोवंश में देखा जाने वाला सामान्य सामाजिक क्रम बनाए रखती हैं। जानी-पहचानी संभालने वाली की मौजूदगी में ये आमतौर पर भरोसेमंद और आसानी से पास आ जाने वाली होती हैं। जैसा हर गोवंश में होता है, हर पशु का स्वभाव अलग हो सकता है, और बछड़े के साथ गाय सुरक्षात्मक व्यवहार दिखा सकती है, इसलिए माँ गायों और ब्याने के समय सामान्य सावधानी हमेशा ज़रूरी रहती है।

इस नस्ल का संभाले जाने योग्य आकार भी इसे आसान पशु बनाता है। एक सौम्य, मध्यम आकार की गाय को गेट, रास्तों और दुहने वाले स्थान से गुज़ारना किसी बड़े या उत्तेजित पशु की तुलना में सरल होता है, यही एक कारण है कि यह नस्ल छोटे और पारिवारिक फार्मों में पसंद की जाती है।

गर्नज़ी के स्वभाव गुणों की रेटिंग (1 कम से 5 अधिक)
गुणरेटिंग
स्नेह (संभालने वालों के प्रति)4
ऊर्जा2
प्रशिक्षण क्षमता (दिनचर्या के लिए)4
आवाज़ करने की प्रवृत्ति2
बाल झड़ना (मौसमी)3

देखभाल और प्रबंधन

गर्नज़ी को अच्छे चरागाह, दुग्धकाल में रोज़ाना दुहने, नियमित खुर और त्वचा की देखभाल, और मौसम की मार से बचाव की ज़रूरत होती है।

गर्नज़ी गायें चरागाह में कुशलता से पलने वाला गोवंश हैं और चराई-आधारित व्यवस्था में अच्छी तरह पनपती हैं, जहाँ घास और चारा आहार का मुख्य हिस्सा बनता है। रोज़मर्रा के प्रबंधन का केंद्र दुहने की दिनचर्या, आहार और पशुओं को स्वस्थ तथा साफ रखना है। दुग्धकाल में गाय को नियमित समय पर दुहना ज़रूरी है, आमतौर पर दिन में दो बार।

साज-संवार

  • कोट को साफ रखने और त्वचा पर परजीवी या घाव जाँचने के लिए नियमित रूप से ब्रश करें।
  • लंगड़ापन रोकने के लिए खुरों की नियमित जाँच और कटाई करें।
  • थन में सूजन (मैस्टाइटिस) का खतरा कम करने के लिए दुहने से पहले और बाद में उसे साफ रखें।
  • जूँ और मक्खियों जैसे बाहरी परजीवियों पर नज़र रखें और ज़रूरत पड़ने पर उपचार करें।

व्यायाम

  • पशु को खुलकर घूमने के लिए रोज़ चरागाह या बड़े बाड़े तक पहुँच दें।
  • दिन भर चराई करने दें, इससे आहार और स्वाभाविक व्यायाम दोनों साथ हो जाते हैं।
  • गायों को लंबे समय तक बंद जगह में न रखें, इससे पैर और शरीर की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

वातावरण

गर्नज़ी समशीतोष्ण जलवायु में अच्छी तरह ढल जाती है और हल्के मौसम में साल के अधिकांश समय बाहर चरती है। गर्म मौसम में छाया और ताज़ा पानी दें, क्योंकि इस नस्ल को गर्मी का तनाव महसूस हो सकता है, और ठंडे, गीले या तेज़ हवा वाले समय में सूखी शरण या आवास उपलब्ध कराएँ। साफ, अच्छी जल-निकासी वाली ज़मीन और आवास में सूखा बिछावन खुर और थन की समस्याओं को रोकने में मदद करता है।

आहार और पोषण

गर्नज़ी चारे का कुशलता से उपयोग करने वाली नस्ल है, जिसके आहार का आधार अच्छी चराई और गुणवत्तापूर्ण चारा है, साथ ही दुग्धकाल में अतिरिक्त आहार और हर समय साफ पानी ज़रूरी है।

गर्नज़ी चारे को दूध में बदलने में कुशल है, इसलिए आहार का आधार चराई के मौसम में अच्छा चरागाह और घास कम होने पर सूखी घास या साइलेज जैसा संरक्षित चारा होता है। दुग्धकाल में गायों को ऊर्जा और प्रोटीन की ज़्यादा ज़रूरत होती है, और उन्हें आमतौर पर दूध उत्पादन के अनुसार संतुलित अतिरिक्त सांद्र आहार दिया जाता है। सटीक मात्रा शरीर के वज़न, दूध उत्पादन, चरागाह की गुणवत्ता और दुग्धकाल की अवस्था पर निर्भर करती है, और किसी विशेष झुंड के लिए राशन पशु पोषण विशेषज्ञ या पशुचिकित्सक तय कर सकते हैं।

सामान्य आहार मार्गदर्शिका (दूध उत्पादन और चरागाह के अनुसार बदलती है)
जीवन अवस्थाप्रतिदिन मात्राभोजन की संख्या
बछड़ा (दूध अवस्था)शरीर के वज़न के अनुसार दूध या दूध का विकल्प, साथ ही स्टार्टर आहार2 या अधिक बार
बढ़ती बछियाचारा और मापी गई मात्रा में सांद्र आहारचराई के साथ 1 से 2 बार
सूखी गाय (दूध न देने वाली)मुख्य रूप से शरीर की स्थिति बनाए रखने के लिए चाराचराई या 1 बार चारा
दुहने वाली गायदूध उत्पादन के अनुसार चारा और सांद्र आहारअक्सर हर दुहाई के समय

पुरस्कार स्वरूप आहार और पूरक

दुग्धकाल में खासतौर पर खनिज और नमक की उपलब्धता ज़रूरी है, और खुले में रखा खनिज ब्लॉक या संतुलित खनिज मिश्रण सामान्य ज़रूरतें पूरी करता है। थोड़ी मात्रा में जड़ वाली सब्ज़ियाँ या अच्छी घास पुरस्कार के तौर पर और संभालने को आसान बनाने के लिए दी जा सकती हैं। साफ ताज़ा पानी हर समय उपलब्ध होना चाहिए, क्योंकि दुहने वाली गाय हर दिन काफी मात्रा में पानी पीती है।

स्वास्थ्य और सामान्य समस्याएँ

गर्नज़ी आमतौर पर मज़बूत डेयरी गोवंश है और लगभग 12 से 15 वर्ष जीती है, हालाँकि इसमें मैस्टाइटिस, लंगड़ापन और ब्याने के आसपास चयापचय संबंधी जोखिम आम डेयरी गायों जैसे ही रहते हैं।

गर्नज़ी आमतौर पर मज़बूत और लंबी उम्र वाली डेयरी नस्ल है, अच्छी देखभाल में इसकी सामान्य आयु लगभग 12 से 15 वर्ष होती है, हालाँकि व्यावसायिक फार्म पर इसका उत्पादक कार्यकाल अक्सर इससे कम होता है। डेयरी पशु होने के कारण, इसके मुख्य स्वास्थ्य जोखिम नस्ल संबंधी दोषों की बजाय दुग्धकाल और ब्याने से जुड़े होते हैं। अच्छा पोषण, साफ आवास और नियमित पशुचिकित्सा देखभाल ज़्यादातर समस्याओं को काबू में रखते हैं।

डेयरी गोवंश में सामान्य समस्याएँ
समस्यालक्षणटिप्पणी
मैस्टाइटिसथन में सूजन या गर्माहट, असामान्य दूधदुहने की स्वच्छता से जुड़ा, जल्दी उपचार करें
लंगड़ापन/खुर की समस्यालंगड़ाना, चलने में अनिच्छानियमित खुर कटाई और सूखी ज़मीन से रोकथाम
मिल्क फीवर (हाइपोकैल्सीमिया)कमज़ोरी, लड़खड़ाना, ब्याने के बाद बैठ जानाब्याने के समय का चयापचय जोखिम, ब्याने से पहले आहार प्रबंधित करें
कीटोसिसभूख और दूध में कमी, वज़न घटनादुग्धकाल की शुरुआत में ऊर्जा की कमी
ब्लोट (पेट फूलना)बाईं ओर पेट फूलना, बेचैनीगाढ़े चरागाह या अचानक आहार बदलाव पर ध्यान दें

रोकथाम की देखभाल

  • पशुचिकित्सक की सलाह से टीकाकरण और परजीवी नियंत्रण कार्यक्रम तय रखें।
  • खुरों की नियमित जाँच और कटाई करें।
  • मैस्टाइटिस का जोखिम घटाने के लिए दुहने की स्वच्छता बनाए रखें।
  • मिल्क फीवर और कीटोसिस रोकने के लिए ब्याने के आसपास आहार प्रबंधित करें।
  • संतुलित खनिज और लगातार साफ पानी उपलब्ध कराएँ।

प्रजनन और बछड़ों का पालन

गर्नज़ी गाय लगभग 15 महीने की उम्र में प्रजनन योग्य होती है, लगभग नौ महीने गर्भ धारण करती है, और आमतौर पर एक बछड़े को जन्म देती है जिसे दूध छुड़ाने से पहले दूध पर पाला जाता है।

गर्नज़ी बछिया को आमतौर पर 13 से 15 महीने की उम्र में प्रजनन के लिए तैयार माना जाता है, ताकि वह लगभग दो साल की उम्र में ब्याए, हालाँकि सही समय उम्र से ज़्यादा उसकी बढ़त और शरीर की स्थिति पर निर्भर करता है। प्रजनन सांड के साथ प्राकृतिक रूप से या, डेयरी फार्मों पर अधिकतर, कृत्रिम गर्भाधान से कराया जाता है, जिससे पंजीकृत सांडों का उपयोग और झुंड सुधार संभव हो पाता है।

गर्भकाल लगभग नौ महीने, यानी करीब 283 दिन का होता है, और गाय आमतौर पर एक ही बछड़े को जन्म देती है, कभी-कभार जुड़वाँ बछड़े भी होते हैं। इस नस्ल में ब्याना आमतौर पर सीधा-सादा होता है, फिर भी अनुमानित तारीख नज़दीक आने पर गाय पर नज़र रखनी चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर ही मदद करनी चाहिए।

नवजात बछड़े को जन्म के तुरंत बाद कोलोस्ट्रम (गाढ़ा पहला दूध) पिलाना ज़रूरी है ताकि शुरुआती प्रतिरोधक क्षमता मिल सके। इसके बाद बछड़े को दूध या दूध के विकल्प पर पाला जाता है और धीरे-धीरे स्टार्टर आहार तथा चारे से परिचित कराया जाता है, दूध छुड़ाने की प्रक्रिया आमतौर पर व्यवस्था के अनुसार लगभग दो से तीन महीने में पूरी होती है। मादा बछड़ों को अक्सर झुंड में बनाए रखा जाता है, जबकि नर बछड़ों का प्रबंधन फार्म के अनुसार अलग-अलग होता है।

गर्नज़ी प्रजनन से जुड़े तथ्य
मापदंडमान
प्रजनन आयु (बछिया)लगभग 13 से 15 महीने
गर्भकाललगभग 283 दिन (करीब 9 महीने)
बच्चों की संख्याआमतौर पर 1 बछड़ा
दूध छुड़ाने की आयुलगभग 2 से 3 महीने
ब्याने का अंतराल (प्रबंधित)लगभग 12 से 13 महीने

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्नज़ी से जुड़े आम सवालों में इसका आकार, स्वभाव, दूध, उम्र, पालना कितना आसान है और उपलब्धता शामिल हैं।

गर्नज़ी गाय कितनी बड़ी होती है?

गर्नज़ी मध्यम आकार की डेयरी नस्ल है। गाय का वज़न आमतौर पर 450 से 500 किलोग्राम रहता है और कंधे तक ऊँचाई लगभग 130 से 140 सेंटीमीटर होती है, यह होल्स्टीन से छोटी पर मज़बूत बनावट वाली होती है। सांड इससे भारी होते हैं, आमतौर पर 600 से 750 किलोग्राम के बीच।

गर्नज़ी का स्वभाव कैसा होता है?

गर्नज़ी शांत, सौम्य और मिलनसार होती है। इसे संभालना और दुहना आसान रहता है और यह दिनचर्या में जल्दी ढल जाती है, यही वजह है कि यह छोटे और पारिवारिक डेयरी फार्मों में पसंद की जाती है।

गर्नज़ी का दूध सुनहरा क्यों होता है?

यह सुनहरा रंग बीटा-कैरोटीन की अधिक मात्रा से आता है, जो इस नस्ल के दूध और त्वचा दोनों में पाया जाता है। यही रंगद्रव्य इसकी त्वचा को पीलापन और कोट को सुनहरा रंग भी देता है।

गर्नज़ी कितने साल जीती है?

अच्छी देखभाल में गर्नज़ी आमतौर पर 12 से 15 साल जीती है, हालाँकि व्यावसायिक डेयरी फार्म पर इसका उत्पादक कार्यकाल अक्सर इससे कम होता है।

क्या गर्नज़ी पालना आसान है?

डेयरी नस्लों में यह अपेक्षाकृत आसान मानी जाती है, क्योंकि इसका स्वभाव शांत है, आकार मध्यम है और यह चारे का कुशलता से उपयोग करती है। फिर भी इसे चराई के लिए ज़मीन, दुग्धकाल में रोज़ाना दुहाई और नियमित पशुचिकित्सा तथा खुर की देखभाल चाहिए।

गर्नज़ी कितना दूध देती है?

गर्नज़ी अपने आकार के हिसाब से अच्छी मात्रा में दूध देती है, जिसमें वसा और प्रोटीन की मात्रा बड़ी नस्लों की अधिकतम मात्रा से कहीं ज़्यादा होती है। सटीक उत्पादन गाय, आहार और प्रबंधन पर निर्भर करता है।

क्या गर्नज़ी आसानी से मिल जाती है?

गर्नज़ी को यूनाइटेड किंगडम, उत्तरी अमेरिका और अन्य क्षेत्रों में मान्यता प्राप्त डेयरी नस्ल के रूप में पाला जाता है, और नस्ल संगठन इसकी झुंड-पंजी बनाए रखते हैं। यह होल्स्टीन जैसी अधिक दूध देने वाली नस्लों की तुलना में कम आम है और कुछ जगहों पर इसे संरक्षण नस्ल के रूप में भी पाला जाता है।

No questions about the ग्वेर्नसी yet. Be the first to ask.