शारोले
शारोले एक बड़ी, मांसल फ़्रांसीसी गोमांस नस्ल है, जिसे इसके शांत स्वभाव, तीव्र वृद्धि और उत्कृष्ट दुबले मांस की उपज के लिए सराहा जाता है।
- Size
- विशालकाय
- Lifespan
- 12–18 years
- Origin
- फ़्रांस
- Temperament
- शांत
- Standard colors
- सफ़ेद और क्रीम
Characteristics
शारोले colors and patterns
What each club's breed standard says about every शारोले color and pattern. Point at a ruling to see the club's own wording.
Breed standards describe the शारोले in सफ़ेद और क्रीम.
What the rulings mean
- मानक
- Described by the club's breed standard.
Sources
Each ruling comes from the club's published breed standard or color list.
शारोले नस्ल के बारे में
शारोले एक विशाल फ्रांसीसी मांस-नस्ल है, जो शांत स्वभाव, तेज़ वृद्धि और दुबले मांस की अधिक पैदावार के लिए जानी जाती है।
शारोले मांस के लिए पाली जाने वाली गोवंश नस्ल है, जिसकी उत्पत्ति मध्य फ्रांस में हुई। यह दुनिया भर में पाली जाने वाली सबसे बड़ी मांस-नस्लों में गिनी जाती है, और वयस्क बैलों का वज़न अक्सर 1,000 किलोग्राम से भी अधिक होता है। इस नस्ल की पहचान इसकी लगभग सफ़ेद से क्रीम रंग की खाल और भारी, मज़बूत मांसल शरीर से होती है।
शारोले गोवंश मुख्यतः मांस के लिए पाला जाता है। ये तेज़ी से बढ़ते हैं, खाए गए चारे को कुशलता से मांसपेशियों में बदलते हैं, और इनके शव में दुबले मांस का हिस्सा अधिक तथा चर्बी अपेक्षाकृत कम होती है। इन्हीं गुणों के कारण इस नस्ल का इस्तेमाल संकर प्रजनन (क्रॉसब्रीडिंग) कार्यक्रमों में बड़े पैमाने पर होता है, जहाँ शारोले बैलों को अन्य नस्लों की गायों से मिलाकर बछड़ों में आकार और वृद्धि दर बढ़ाई जाती है।
यह नस्ल फ्रांस से बाहर भी दूर-दूर तक फैल चुकी है और अब यूरोप, उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा अफ़्रीका के कुछ हिस्सों में पाई जाती है। यह अलग-अलग जलवायु और पालन-प्रणालियों के अनुसार ढल जाती है, चाहे खुले चरागाहों में बड़े झुंड हों या अधिक गहन आहार-आधारित फ़ार्म।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मूल स्थान | फ्रांस |
| आकार | विशालकाय (वयस्क बैलों का वज़न अक्सर 1,000 किलोग्राम से अधिक) |
| जीवनकाल | 12 से 18 साल |
| उपयोग | मांस उत्पादन और संकर प्रजनन |
| उपयुक्त परिवेश | खुला चरागाह, मिश्रित-नस्ल झुंड, अनुभवी पशुपालक |
किनके लिए उपयुक्त है
शारोले उन मांस उत्पादकों के लिए उपयुक्त है जिन्हें तेज़ी से बढ़ने वाले बछड़े और दुबले मांस की ऊँची पैदावार चाहिए। इस नस्ल के आकार के चलते पशुपालकों को मज़बूत बाड़, ठोस संभाल-सुविधाएँ, और बड़े जानवरों के लिए पर्याप्त चारा व चरागाह चाहिए होते हैं। यह व्यावसायिक झुंडों और संकर प्रजनन कार्यक्रमों के लिए बेहतर मेल है, लेकिन पशुओं का आकार इसे सीमित साधनों वाली बहुत छोटी होल्डिंग के लिए कम व्यावहारिक बनाता है।
इतिहास और उत्पत्ति
शारोले नस्ल मध्य फ्रांस के शारोले क्षेत्र में विकसित हुई और बाद में दुनिया भर में पहुँची, जिसकी नस्ल-पंजी उन्नीसवीं सदी में फ्रांस में बनी।
इस नस्ल का नाम मध्य-पूर्वी फ्रांस के सोन-ए-लुआर क्षेत्र में स्थित शारोल के आस-पास के इलाक़े से लिया गया है। इस इलाक़े में सदियों से इस तरह के गोवंश पाले जाते रहे हैं, जिनका इस्तेमाल पहले खेती और ढुलाई के लिए बोझ ढोने वाले पशुओं के रूप में तथा मांस के स्रोत के तौर पर भी होता था।
समय के साथ फ्रांसीसी पशुपालकों ने बोझ ढोने की क्षमता के बजाय आकार, मांसलता और वृद्धि दर के आधार पर चयन शुरू किया। सन 1864 में फ्रांस में इस नस्ल की एक हर्ड बुक बनाई गई, जिसने रिकॉर्ड-रखरखाव और चयन प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया। पशुपालकों ने शव की गुणवत्ता और वृद्धि दर सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया, और यही गुण आधुनिक शारोले की पहचान बने।
अपने शुरुआती इतिहास के अधिकांश समय में यह नस्ल मुख्यतः फ्रांस तक ही सीमित रही। बीसवीं सदी में इसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, जब इसके आकार और वृद्धि दर ने इसे संकर प्रजनन के लिए आकर्षक बना दिया। कई देशों में पशु और आनुवंशिक सामग्री निर्यात की गई, और शारोले दुनिया की सबसे व्यापक रूप से फैली मांस-नस्लों में से एक बन गई।
चूँकि पशु-स्वास्थ्य कारणों से कुछ क्षेत्रों में यूरोप से जीवित गोवंश के सीधे आयात पर रोक थी, इसलिए कई देशों ने नियंत्रित प्रजनन कार्यक्रमों और बाद में आयातित वीर्य के ज़रिए अपनी शुरुआती शारोले आबादी तैयार की। इनमें से कई देशों में रिकॉर्ड बनाए रखने और नस्ल को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय नस्ल संघ भी बनाए गए।
रूप-रंग
शारोले एक विशाल, गठीले शरीर वाला पशु है, जिसकी खाल लगभग सफ़ेद से क्रीम रंग की, शरीर लंबा-चौड़ा और टांगें मज़बूत होती हैं।
शारोले का शरीर आकार और मांसलता के लिए बना है। धड़ लंबा और गहरा होता है, पीठ चौड़ी और पिछला हिस्सा भरा-पूरा होता है। टांगें मज़बूत होती हैं और भारी शरीर का वज़न संभालने के लिए ठीक नीचे टिकी होती हैं। कुल मिलाकर यह एक शक्तिशाली, ठोस बनावट वाला पशु दिखता है।
खाल छोटी और घनी होती है, और इसका रंग सफ़ेद से लेकर हल्के क्रीम या गेहुँए रंग तक होता है। त्वचा आमतौर पर गुलाबी होती है, और थूथन, खुर व सींग हल्के रंग के होते हैं। इस नस्ल में सींग वाली और स्वाभाविक रूप से बिना सींग वाली, दोनों तरह की लाइनें पाई जाती हैं; बाद वाली चयनात्मक प्रजनन से विकसित की गई है।
| गुण | सामान्य दायरा |
|---|---|
| ऊँचाई (कंधे तक) | गायें लगभग 1.4 मीटर, बैल इससे ऊँचे |
| वज़न | गायें 700 से 900 किलोग्राम, बैल 1,000 से 1,250 किलोग्राम या अधिक |
| खाल | छोटी, घनी |
| रंग | सफ़ेद से हल्का क्रीम या गेहुँआ |
| आँखें | गहरे रंग की, हल्के रंग के चेहरे पर |
खाल और रंग
हल्के रंग की खाल इस नस्ल की सबसे पहचानी जाने वाली विशेषता है। इसका रंग साफ़ सफ़ेद से लेकर मुलायम क्रीम टोन तक जाता है। हल्के बाल, गुलाबी त्वचा और हल्के रंग के सींग-खुर पूरी नस्ल में एक जैसे रहते हैं, जिससे शुद्ध नस्ल के शारोले को पहचानना आसान हो जाता है। संकर बछड़ों में यह हल्का रंग अक्सर आंशिक रूप से आगे बढ़ जाता है और गहरे रंग की गायों की संतान का रंग भी हल्का कर सकता है।
स्वभाव
शारोले आमतौर पर शांत, नरम और संतुलित स्वभाव का होता है, जिससे इतने बड़े पशु को संभालना आसान हो जाता है।
शारोले गोवंश अपने शांत और स्थिर स्वभाव के लिए जाना जाता है। इस नस्ल को शांत, नरम और संतुलित बताया जाता है, और इतने बड़े पशु में ये गुण बहुत मायने रखते हैं। अच्छी तरह संभाले गए पशु आत्मविश्वासी होते हैं और बिना ज़्यादा हील-हुज्जत के दिनचर्या में ढल जाते हैं।
झुंड में शारोले गोवंश अपनी नस्ल के साथ-साथ दूसरी नस्लों के पशुओं के साथ भी आसानी से घुल-मिल जाता है, यही एक वजह है कि यह संकर प्रजनन कार्यक्रमों में अच्छा काम करता है। गायें अपने बछड़ों की चौकस देखभाल करती हैं और आमतौर पर उनकी रक्षा को लेकर सतर्क रहती हैं, इसलिए ब्यांत के समय पशुपालक गाय-बछड़े की जोड़ी को अतिरिक्त जगह देते हैं।
लोगों के आस-पास नियमित और शांत तरीक़े से संभालने पर पशु स्थिर रहते हैं और उन्हें हांकना आसान होता है। किसी भी बड़ी नस्ल की तरह, स्वभाव हर पशु में अलग-अलग हो सकता है, और बैलों के मामले में सामान्य स्वभाव चाहे जैसा भी हो, सतर्कता और मज़बूत सुविधाओं की ज़रूरत हमेशा रहती है।
| गुण | रेटिंग |
|---|---|
| स्नेह | 3 |
| ऊर्जा | 2 |
| प्रशिक्षणशीलता | 3 |
| आवाज़ करने की प्रवृत्ति | 2 |
| बाल झड़ना | 3 |
देखभाल और संभाल
शारोले को अच्छे चरागाह या चारे, मज़बूत संभाल-सुविधाओं और एक बेहद बड़ी नस्ल के अनुरूप नियमित झुंड-प्रबंधन की ज़रूरत होती है।
शारोले गोवंश की देखभाल का मूल आधार बड़े चरने वाले पशुओं की ज़रूरतें पूरी करना है: पर्याप्त चारा, साफ़ पानी, कड़े मौसम से बचाव के लिए आश्रय, और इतने बड़े आकार को सुरक्षित ढंग से संभालने लायक़ मज़बूत सुविधाएँ।
साज-संवार
- खाल और त्वचा की नियमित जाँच करें ताकि जूँ, चिचड़ी और मक्खी जैसे परजीवी न पनपें
- पशुओं को साफ़ रखें और जहाँ संभव हो रगड़ने के लिए खंभे या ब्रश उपलब्ध कराएँ
- खुरों की जाँच करें और लंगड़ेपन से बचाव के लिए ज़रूरत अनुसार काट-छाँट या उपचार करें
- तेज़ धूप में आँखों और थूथन के आस-पास की हल्की त्वचा पर धूप से जलने के लक्षणों पर नज़र रखें
व्यायाम
- पशुओं को स्वतंत्र रूप से घूमने और चरने के लिए खुला चरागाह दें
- चरागाह की गुणवत्ता बनाए रखने और परजीवियों का बोझ घटाने के लिए चरने वाले क्षेत्रों को बदलते रहें
- झुंड को बिना भीड़भाड़ के घूमने की जगह दें, इससे पशु शांत रहते हैं
परिवेश
शारोले गोवंश अच्छे चरागाह में बढ़िया रहता है और अलग-अलग जलवायु सह लेता है। गर्म मौसम में इन्हें छाया और आश्रय चाहिए, क्योंकि हल्की त्वचा पर धूप से जलने का ख़तरा रहता है, और ठंडे-नम मौसम में हवा से बचाव या आश्रय भी ज़रूरी है। बाड़ और संभाल के उपकरण भारी पशुओं के अनुरूप मज़बूत बनाए जाने चाहिए, क्योंकि सामान्य बाड़ इनके आकार और ताक़त के आगे टिक नहीं पाती।
पोषण और आहार
शारोले को चारे पर आधारित ऐसा आहार चाहिए जिसमें उसके बड़े शरीर और तेज़ वृद्धि के लिए पर्याप्त ऊर्जा और प्रोटीन हो, और ज़रूरत पड़ने पर उसे पूरक आहार से बढ़ाया जाए।
शारोले गोवंश चरने वाले पशु हैं, इसलिए आहार का आधार चारा है: चरागाह की घास, सूखा भूसा या साइलेज। यह नस्ल तेज़ी से बढ़ती है और बड़े आकार तक पहुँचती है, इसलिए पशुओं को पर्याप्त ऊर्जा और प्रोटीन देने वाली आहार-आपूर्ति चाहिए, ख़ासकर बढ़ते बछड़ों, गाभिन गायों और बाज़ार के लिए तैयार किए जा रहे पशुओं को। जब अकेला चरागाह इन ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पाता, तो पशुपालक इसमें सांद्र आहार, अनाज या अन्य पूरक आहार जोड़ते हैं।
| जीवन-चरण | दैनिक मात्रा (लगभग) | आहार पद्धति |
|---|---|---|
| बढ़ता बछड़ा | शरीर के वज़न का 2 से 3 प्रतिशत | चारे के साथ क्रीप या पूरक आहार |
| वयस्क गाय | शरीर के वज़न का 2 से 2.5 प्रतिशत | ज़रूरत अनुसार चराई, हे या साइलेज |
| गाभिन या दूध देने वाली गाय | अधिक ऊर्जा और प्रोटीन | चारे के साथ पूरक आहार |
| तैयार किया जा रहा पशु | उच्च-ऊर्जा राशन | चारे के साथ अनाज या सांद्र आहार |
खनिज और पूरक
पशुओं को हर समय साफ़ पानी और उन खनिजों तक पहुँच चाहिए जो चरागाह में शायद पर्याप्त मात्रा में न मिलें। नमक और खनिज लिक या ढीले खनिज मिश्रण तांबा, सेलेनियम और मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म तत्वों की कमी पूरी करने में मदद करते हैं, और सही संतुलन स्थानीय मिट्टी व चारे पर निर्भर करता है। झुंड के आहार और स्थिति के हिसाब से पूरक आहार पर पशु चिकित्सक या पोषण विशेषज्ञ से सलाह ली जा सकती है।
स्वास्थ्य
शारोले आमतौर पर मज़बूत होता है और 12 से 18 साल जी सकता है, हालाँकि इसका बड़ा आकार और मांसलता कुछ ख़ास स्वास्थ्य चिंताएँ लाती हैं, जिनमें ब्यांत में कठिनाई शामिल है।
शारोले गोवंश एक मज़बूत, टिकाऊ नस्ल है और अलग-अलग जलवायु में ढल जाती है। अच्छे प्रबंधन के साथ पशु लगभग 12 से 18 साल तक जी सकते हैं, हालाँकि मांस के लिए पाले जाने वाले पशुओं को अक्सर इससे कम समय के लिए उत्पादक जीवन में रखा जाता है। मुख्य स्वास्थ्य चिंताएँ नस्ल के आकार और मांसलता से जुड़ी हैं: बड़े बछड़ों के चलते ब्यांत मुश्किल हो सकता है, और भारी पशुओं की सेहत मज़बूत पैरों व खुरों पर निर्भर करती है।
| स्थिति | लक्षण | टिप्पणी |
|---|---|---|
| ब्यांत में कठिनाई (डिस्टोसिया) | लंबा या रुका हुआ प्रसव | बड़े बछड़े के आकार से जुड़ी; बैल के चुनाव और गाय की स्थिति का प्रबंधन करें |
| लंगड़ापन और पैरों की समस्या | लंगड़ाना, चलने में अनिच्छा | भारी शरीर पैरों पर दबाव डालता है; खुर कटे-छँटे और ज़मीन सूखी रखें |
| ब्लोट | बाईं ओर की कोख में सूजन, बेचैनी | हरे-भरे चरागाह पर नज़र रखें; भरपूर आहार धीरे-धीरे शुरू करें |
| धूप से जलना | हल्की त्वचा का लाल और दर्दभरा होना | हल्की त्वचा वाली इस नस्ल को तेज़ धूप में छाया दें |
| परजीवी | वज़न घटना, ख़राब खाल | आंतरिक व बाहरी परजीवियों पर नियमित नियंत्रण रखें |
रोकथाम-संबंधी देखभाल
- स्थानीय रोग-जोखिम के अनुसार टीकाकरण कार्यक्रम अपनाएँ
- कृमि, जूँ, चिचड़ी और मक्खियों के लिए नियमित परजीवी नियंत्रण करें
- लंगड़ेपन से बचाव के लिए खुरों को काटें और जाँचें
- शरीर की स्थिति पर नज़र रखें और उत्पादन-चक्र के हिसाब से आहार में बदलाव करें
- ब्यांत के समय गायों पर बारीकी से नज़र रखें और ज़रूरत पड़ने पर मदद करें या पशु चिकित्सक को बुलाएँ
प्रजनन और बछड़ों का पालन
शारोले गायें क़रीब नौ महीने तक एक बछड़ा गर्भ में रखती हैं, और नस्ल के बड़े बछड़ों के आकार के चलते ब्यांत का प्रबंधन सावधानी से किया जाता है, अक्सर बैल के चुनाव और संकर प्रजनन के ज़रिए।
शारोले गोवंश अपने पहले से दूसरे साल में प्रजनन योग्य उम्र तक पहुँच जाता है, और बछियों को आमतौर पर वृद्धि और प्रबंधन के हिसाब से क़रीब दो साल की उम्र में ब्याने के लिए तैयार किया जाता है। संसर्ग प्राकृतिक रूप से बैल के ज़रिए या कृत्रिम गर्भाधान से कराया जाता है, जिसका इस्तेमाल शारोले के आनुवंशिक गुणों को दुनिया भर में फैलाने के लिए व्यापक रूप से होता है।
गर्भावधि लगभग नौ महीने की होती है। गायें आमतौर पर एक ही बछड़ा जनती हैं, और जुड़वाँ बछड़े कम ही होते हैं। शारोले के बछड़े जन्म से ही बड़े होते हैं और जन्म के बाद तेज़ी से बढ़ते हैं, जो इस नस्ल की एक बड़ी आर्थिक ख़ूबी तो है, लेकिन यही वजह है कि ब्यांत पर बारीकी से नज़र रखी जाती है। पशुपालक बैल के चुनाव के ज़रिए और शारोले नर पशुओं को उपयुक्त आकार की गायों से मिलाकर, अक्सर संकर प्रजनन कार्यक्रमों में, बछड़े के आकार को नियंत्रित करते हैं।
गायें चौकस माँ साबित होती हैं और इतना दूध देती हैं कि बछड़े मज़बूती से पल सकें। बछड़ों को आमतौर पर कुछ महीनों की उम्र में दूध छुड़ाया जाता है, जिसके बाद वे बाज़ार या प्रजनन के वज़न तक पहुँचने के लिए चरागाह या आहार पर तेज़ी से बढ़ते रहते हैं।
| माप | मूल्य |
|---|---|
| प्रजनन योग्य उम्र | क़रीब 1 से 2 साल |
| गर्भावधि | लगभग 9 महीने (क़रीब 280 से 290 दिन) |
| एक बार में बछड़े | आमतौर पर 1 बछड़ा |
| जन्म के समय वज़न | कई नस्लों की तुलना में अधिक |
| दूध छुड़ाना | कुछ महीनों की उम्र में |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शारोले से जुड़े आम सवालों में इसका आकार, स्वभाव, देखभाल की ज़रूरतें, जीवनकाल, उपयुक्तता और यह नस्ल कहाँ पाई जाती है, शामिल हैं।
शारोले का आकार कितना बड़ा होता है?
शारोले एक विशालकाय मांस-नस्ल है। गायों का वज़न आमतौर पर 700 से 900 किलोग्राम और बैलों का 1,000 से 1,250 किलोग्राम या उससे अधिक होता है, और इनका शरीर लंबा व भारी मांसल होता है।
शारोले का स्वभाव कैसा होता है?
यह नस्ल आमतौर पर शांत, नरम और संतुलित स्वभाव की होती है। शांत तरीक़े से संभालने पर पशु स्थिर रहते हैं, फिर भी बैलों के मामले में सतर्कता और मज़बूत सुविधाएँ ज़रूरी हैं।
क्या शारोले पालना मुश्किल है?
सही व्यवस्था के साथ इसे पालना मुश्किल नहीं है, लेकिन इसके आकार के लिए मज़बूत बाड़, ठोस संभाल-सुविधाएँ और बड़े पशुओं के लिए पर्याप्त चारा व चरागाह चाहिए।
शारोले कितने साल जीता है?
अच्छे प्रबंधन के साथ शारोले गोवंश लगभग 12 से 18 साल जी सकता है, हालाँकि मांस के पशुओं को अक्सर इससे कम समय के लिए उत्पादक जीवन में रखा जाता है।
शारोले का इस्तेमाल किस लिए होता है?
इसे मुख्यतः मांस के लिए पाला जाता है। यह नस्ल तेज़ी से बढ़ती है और दुबले मांस की ऊँची पैदावार देती है, और अन्य नस्लों में आकार व वृद्धि जोड़ने के लिए संकर प्रजनन में व्यापक रूप से इस्तेमाल होती है।
शारोले की उत्पत्ति कहाँ से हुई?
इस नस्ल की उत्पत्ति मध्य फ्रांस के शारोले क्षेत्र में हुई और अब यह यूरोप, अमेरिका महाद्वीपों, ऑस्ट्रेलिया और उससे आगे भी पाई जाती है।
इस नस्ल में ब्यांत पर अतिरिक्त ध्यान क्यों देना पड़ता है?
शारोले के बछड़े जन्म के समय बड़े होते हैं, इसलिए ब्यांत मुश्किल हो सकता है। पशुपालक बैल के चुनाव और उपयुक्त आकार की गायों से नर पशुओं को मिलाकर इसे नियंत्रित करते हैं।