ब्राह्मण
ब्राह्मन एक गर्मी-सहनशील कूबड़ वाली नस्ल है, जो अपनी बुद्धिमत्ता, मजबूती और कठोर जलवायु तथा कीटों के प्रति उल्लेखनीय प्रतिरोध के लिए सराही जाती है।
- Size
- बड़ा
- Lifespan
- 12–20 years
- Origin
- भारत
- Temperament
- बुद्धिमान
Characteristics
ब्राह्मण colors and patterns
What each club's breed standard says about every ब्राह्मण color and pattern. Point at a ruling to see the club's own wording.
| Color or pattern |
|---|
| काला |
धूसर
| Color or pattern | ABBA |
|---|---|
| स्लेटी | मानक (“Grey Brahman”) |
लाल
| Color or pattern | ABBA |
|---|---|
| लाल | मानक (“Red Brahman”) |
What the rulings mean
- मानक
- Described by the club's breed standard.
Color changes
How a ब्राह्मण's colors can change over its life.
स्लेटीchanges toकाला
फ़र · उम्र के साथ · males only
Sources
Each ruling comes from the club's published breed standard or color list.
ब्राह्मण नस्ल के बारे में
ब्राह्मण एक बड़ी कूबड़ वाली गोमांस नस्ल है, जिसे भारतीय जेबू मवेशियों से अमेरिका में विकसित किया गया, गर्मी सहनशीलता और रोग प्रतिरोध के लिए जानी जाती है।
ब्राह्मण गोमांस के लिए पाली जाने वाली एक बड़ी नस्ल है, जो भारत से लाए गए जेबू मवेशियों (बॉस इंडिकस) की वंशज है। इसकी पहचान कंधों और गर्दन पर उभरे कूबड़, गले और गलकंबल की ढीली त्वचा की परतों, तथा बड़े लटकते कानों से होती है। वयस्क बैलों का वजन आमतौर पर 800 से 1,100 किलोग्राम और गायों का 500 से 700 किलोग्राम तक होता है।
बीसवीं सदी की शुरुआत में अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में गुज़रात, नेल्लोर, गिर और कृष्णा वैली जैसी कई भारतीय नस्लों के मवेशियों को मिलाकर यह नस्ल तैयार की गई। पशुपालकों ने ऐसे पशु चुने जो गर्म, नम और कीड़ों से भरे माहौल में पनप सकें, जहाँ यूरोपीय मवेशी टिक नहीं पाते थे। नतीजा एक ऐसा पशु है जो तेज़ गर्मी झेल लेता है, घटिया चारे पर भी जीवित रहता है, और किलनी तथा कई परजीवियों से खुद को बचा लेता है।
ब्राह्मण मवेशी गोमांस उत्पादन के लिए और उतनी ही आम तौर पर संकरण के लिए पाले जाते हैं। ब्राह्मण को किसी ब्रिटिश या यूरोपीय महाद्वीपीय नस्ल के साथ मिलाने पर ऐसे बछड़े मिलते हैं जिनमें ब्राह्मण की गर्मी सहनशीलता और मज़बूती तथा दूसरे माता-पिता के मांस गुण दोनों आ जाते हैं। यही संकर ओज एक बड़ा कारण है कि यह नस्ल दुनिया भर के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय इलाकों में फैल गई।
किसके लिए उपयुक्त है
ब्राह्मण उन पशुपालकों के लिए उपयुक्त है जो गर्म या नम जलवायु में बड़े चारागाहों या खुले रेंज पर काम करते हैं, जहाँ तेज़ शुरुआती बढ़त से ज़्यादा गर्मी सहनशीलता और कम देखभाल की ज़रूरत मायने रखती है। छोटी जोत या बंद बाड़े में पालने के लिए यह उतना उपयुक्त नहीं। शांत तरीके से और नियमित दिनचर्या के साथ संभालने पर इस नस्ल का सहज स्वभाव सामने आता है।
| गुण | विवरण |
|---|---|
| मूल | भारत (जेबू वंश); नस्ल का विकास अमेरिका में हुआ |
| आकार | बड़ा (बैल 800 से 1,100 किग्रा, गाय 500 से 700 किग्रा) |
| आयु | 12 से 20 वर्ष |
| समूह / भूमिका | गोमांस मवेशी; संकरण में व्यापक उपयोग |
| अनुकूल वातावरण | गर्म, नम जलवायु और विस्तृत चारागाह प्रणाली |
इतिहास और उद्गम
ब्राह्मण नस्ल को बीसवीं सदी की शुरुआत में अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में कई भारतीय जेबू नस्लों से तैयार किया गया, फिर गर्म जलवायु वाले देशों में इसका निर्यात हुआ।
ब्राह्मण के पूर्वज भारतीय उपमहाद्वीप के जेबू मवेशी हैं, जिनकी पहचान कंधे के कूबड़ से होती है और जो हज़ारों सालों में गर्मी, सूखे और परजीवियों के अनुकूल ढल गए। इन्हें बॉस इंडिकस के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जो यूरोप के टॉरिन (बॉस टॉरस) मवेशियों से अलग हैं।
उन्नीसवीं और बीसवीं सदी की शुरुआत में कई खेपों में भारतीय मवेशी अमेरिका पहुँचे। गुज़रात, नेल्लोर, गिर और कृष्णा वैली जैसी नस्लों के पशु गल्फ तट क्षेत्र में उतारे गए। खासकर टेक्सास और गल्फ तट के अमेरिकी पशुपालकों ने इन नस्लों को मिलाकर एक ऐसा पशु तैयार करना शुरू किया जो वहाँ की गर्मी और नमी झेल सके।
इस मिश्रित नस्ल को ब्राह्मण नाम दिया गया, और 1924 में अमेरिकन ब्राह्मण ब्रीडर्स एसोसिएशन का गठन हुआ ताकि इन मवेशियों का पंजीकरण हो सके और नस्ल के मानक तय हों। आने वाले दशकों में पशुपालकों ने पशुओं के स्वरूप को निखारा और वह आबादी तैयार की जो आज इस नस्ल की पहचान है।
अमेरिका से ब्राह्मण मवेशी और उनकी आनुवंशिकता ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका और अन्य गर्म क्षेत्रों तक पहुँची। यह नस्ल कई मिश्रित नस्लों की नींव भी बनी, जिनमें ब्रैंगस, सांता गर्ट्रूडिस और बीफमास्टर शामिल हैं। इन सभी को ब्राह्मण और टॉरिन नस्लों के संकरण से तैयार किया गया ताकि उत्पादक गोमांस झुंडों में गर्मी सहनशीलता स्थायी रूप से आ सके।
रूप-रंग और नस्ल मानक
ब्राह्मण एक बड़ा, मांसल पशु है जिसकी पहचान स्पष्ट कंधे के कूबड़, ढीली गलकंबल त्वचा और बड़े लटकते कानों से होती है, रंग अक्सर हल्का से मध्यम धूसर या लाल।
ब्राह्मण की पहचान तुरंत कंधों पर मांसपेशियों और संयोजी ऊतक से बने कूबड़ से हो जाती है, जो बैलों में गायों की तुलना में बड़ा होता है। इस नस्ल में गहरी, लटकती गलकंबल और गले तथा पेट के निचले हिस्से पर त्वचा की ढीली परतें होती हैं, जो ठंडक के लिए त्वचा का क्षेत्रफल बढ़ा देती हैं। कान बड़े होते हैं और नीचे की ओर लटकते हैं, जबकि सिर काफी लंबा होता है और इसकी प्रोफ़ाइल हल्की उभरी हुई होती है।
शरीर मांसल है, टाँगें मज़बूत हैं और ढाँचा मध्यम आकार का है। त्वचा मोटी, रंजित और लचीली होती है, और उस पर छोटे, चिकने बाल होते हैं। ये सभी गुण नस्ल को गर्मी छोड़ने और काटने वाले कीड़ों को दूर रखने में मदद करते हैं।
| गुण | मानक |
|---|---|
| ऊँचाई | बैल कंधे तक लगभग 1.5 से 1.7 मीटर; गाय थोड़ी कम |
| वजन | बैल 800 से 1,100 किग्रा; गाय 500 से 700 किग्रा |
| त्वचा-बाल | मोटी, ढीली, रंजित त्वचा पर छोटे, चिकने बाल |
| रंग | हल्के से मध्यम धूसर, और लाल; बैलों की गर्दन व कंधे अक्सर गहरे रंग के |
| आँखें | गहरे रंग की, रंजित पलकों और उभरी भौंहों के साथ जो धूप से बचाव करती हैं |
बाल और रंग
सबसे आम रंग धूसर है, जो लगभग सफ़ेद से लेकर मध्यम धूसर तक होता है, और वयस्क बैलों की गर्दन, कंधे तथा पिछले हिस्से पर आमतौर पर गहरा रंग होता है। लाल रंग भी पाया जाता है और कई रजिस्ट्रियों में मान्य है। बालों के नीचे त्वचा में गहरा रंजक तेज़ धूप से बचाव करता है, और छोटे बाल पसीने तथा हवा को त्वचा तक पहुँचने देते हैं जिससे ठंडक मिलती रहती है।
स्वभाव और व्यवहार
ब्राह्मण मवेशी बुद्धिमान, सतर्क और नियमित संभाल पर आमतौर पर शांत होते हैं, गायों में मातृ प्रवृत्ति मज़बूत और झुंड की रक्षा की भावना होती है।
ब्राह्मण मवेशी बुद्धिमान और चौकस होते हैं। ये दिनचर्या जल्दी सीख लेते हैं और लगातार, शांत तरीके से संभाले जाने पर अच्छी प्रतिक्रिया देते हैं, इसीलिए कम उम्र से नियमित मानवीय संपर्क ज़रूरी है। जिन पशुओं को शांति से संभाला जाता है वे सीधे-सादे और काबू में रहने वाले बन जाते हैं, जबकि खुले रेंज में अकेले छोड़े गए पशु लोगों से सतर्क रह सकते हैं।
यह नस्ल सतर्क है और अपने आसपास को लेकर जागरूक रहती है, जो अचानक पास जाने पर घबराहट जैसा लग सकता है। गायों में मातृ प्रवृत्ति मज़बूत होती है, वे अपने बछड़ों की कड़ी निगरानी करती हैं और चौकस माँ साबित होती हैं। झुंड के भीतर ब्राह्मण मवेशी मिल-जुलकर रहते हैं और स्थिर समूह बनाते हैं। बैल आत्मविश्वासी और दबंग हो सकते हैं, इसलिए इन्हें अनुभवी हाथों और मज़बूत बाड़ों की ज़रूरत होती है। अनजान लोगों या अचानक हलचल के प्रति यह नस्ल सतर्क रहती है, जो इसकी सामान्य सजगता का हिस्सा है, आक्रामकता का नहीं।
| गुण | रेटिंग |
|---|---|
| स्नेह (जान-पहचान वाले संभालने वालों के प्रति) | 3 |
| ऊर्जा | 3 |
| प्रशिक्षण-योग्यता | 4 |
| आवाज़ करने की प्रवृत्ति | 2 |
| बाल झड़ना | 2 |
देखभाल और प्रबंधन
ब्राह्मण मवेशी चारागाह पर कम देखभाल में रहते हैं, गर्मी में छाया और पानी, नियमित परजीवी जाँच और शांत, नियमित संभाल से काबू में रहते हैं।
सफ़ाई और जाँच
- नियमित संभाल के दौरान त्वचा, गलकंबल की परतों और कूबड़ के आसपास किलनी, जूँ और जलन के लिए जाँच करें।
- खुर छँटे हुए रखें और पैरों तथा टाँगों की जाँच करें, खासकर नरम या गीली ज़मीन पर रहने वाले पशुओं में।
- कटने या रगड़ लगने पर तुरंत सफ़ाई और उपचार करें, क्योंकि मोटी त्वचा में समस्या छिपी रह सकती है।
व्यायाम
- खुले चारागाह या रेंज की व्यवस्था करें जहाँ मवेशी दिन भर चर सकें और घूम सकें।
- बाड़ और रास्ते ऐसे बनाए रखें कि झुंड चराई, पानी और छाया के बीच आ-जा सके।
- बंद बाड़े में रखने के बजाय झुंड को स्वाभाविक रूप से घूमने दें, यह इस नस्ल की सक्रिय चराई आदत के अनुकूल है।
वातावरण
ब्राह्मण गर्मी के लिए बना है और नमी, तेज़ धूप तथा घटिया चारे को अधिकांश नस्लों से बेहतर झेल लेता है। फिर भी दिन के सबसे गर्म समय में साफ़ पानी और छाया तक पक्की पहुँच ज़रूरी है। लंबे समय तक ठंड और गीले मौसम में यह नस्ल उतनी सहनशील नहीं, इसलिए ठंडे इलाकों में हवा और बारिश से बचाव का इंतज़ाम मायने रखता है। बैलों और बड़ी गायों के साथ सुरक्षित काम के लिए मज़बूत और अच्छी तरह बने बाड़े ज़रूरी हैं।
आहार और पोषण
ब्राह्मण मवेशी मुख्यतः चारागाह और चारे पर पनपते हैं, ज़रूरत पड़ने पर पूरक आहार, खनिज और साफ़ पानी के साथ, और घटिया चराई का भी बेहतर उपयोग करते हैं।
ब्राह्मण चारे पर पलने वाला पशु है और घास तथा झाड़ियों पर अच्छी तरह पनपता है, यहाँ तक कि उन चारागाहों पर भी जो कई यूरोपीय नस्लों के लिए काफ़ी नहीं होते। शुष्क पदार्थ का सेवन शरीर के वजन का लगभग 2 से 3 प्रतिशत प्रतिदिन होता है, यानी 600 किलोग्राम की गाय रोज़ाना करीब 12 से 18 किलोग्राम शुष्क पदार्थ खाती है। जहाँ चारागाह की गुणवत्ता या मात्रा कम पड़ जाए, वहाँ भूसा, साइलेज या सांद्र आहार से कमी पूरी की जाती है। साफ़ पानी हर समय उपलब्ध होना चाहिए, और गर्म मौसम में इसकी खपत तेज़ी से बढ़ जाती है।
| जीवन-चरण | प्रतिदिन मात्रा | भोजन |
|---|---|---|
| बछड़ा (दूध छुड़ाया हुआ) | चारागाह के साथ 1 से 3 किग्रा स्टार्टर या क्रीप फ़ीड | दिन भर चराई |
| बढ़ता / एक वर्ष का पशु | चारा कम पड़ने पर चारागाह के साथ 2 से 4 किग्रा पूरक | लगातार चराई |
| वयस्क गाय | चारे से 12 से 18 किग्रा शुष्क पदार्थ | लगातार चराई |
| दुधारू गाय | चारे के साथ अतिरिक्त ऊर्जा और प्रोटीन पूरक | लगातार चराई |
इनाम और पूरक आहार
स्थानीय मिट्टी और चारे के अनुसार संतुलित खनिज और नमक की डली स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराएँ, क्योंकि कई इलाकों में तांबे, सेलेनियम या अन्य सूक्ष्म खनिजों की कमी होती है। सूखे मौसम या गर्भावस्था के अंतिम दौर में ऊर्जा और प्रोटीन पूरक शरीर की स्थिति बनाए रखने में मदद करते हैं। कोई भी अनाज या सांद्र आहार धीरे-धीरे शुरू करें ताकि पाचन गड़बड़ न हो।
स्वास्थ्य और आयु
ब्राह्मण मवेशी मज़बूत और लंबी उम्र वाले होते हैं, अक्सर 12 से 20 वर्ष तक जीते हैं, परजीवी व गर्मी प्रतिरोध मज़बूत पर ठंड के प्रति कुछ संवेदनशील।
ब्राह्मण अपेक्षाकृत मज़बूत मवेशी नस्लों में गिना जाता है। इसकी मोटी, लचीली त्वचा, छोटे बाल और किलनी तथा कई परजीवियों के प्रति स्वाभाविक प्रतिरोध, उन आम समस्याओं को कम कर देते हैं जो उष्णकटिबंधीय इलाकों में पाले गए टॉरिन मवेशियों में देखी जाती हैं। अच्छे प्रबंधन के साथ यह नस्ल अक्सर 12 से 20 वर्ष तक जीती है, और उत्पादक गायें कई अन्य नस्लों की तुलना में झुंड में अधिक समय तक बनी रह सकती हैं।
इतनी मज़बूती के बावजूद ब्राह्मण मवेशियों को भी झुंड के सामान्य स्वास्थ्य देखभाल की ज़रूरत रहती है, और ये ठंड के तनाव, कुछ बीमारियों तथा प्रबंधन से जुड़ी स्थितियों के प्रति संवेदनशील रहते हैं।
| स्थिति | लक्षण | टिप्पणी |
|---|---|---|
| ठंड का तनाव | ठंडे-गीले मौसम में कँपकँपी, सिमटना, वजन घटना | आश्रय दें; यह नस्ल ठंड से कहीं बेहतर गर्मी झेलती है |
| आंतरिक और बाह्य परजीवी | बालों में बदलाव, वजन घटना, खून की कमी, रगड़ना | ब्राह्मण किलनी को अच्छी तरह झेलता है, फिर भी निगरानी और चारागाह बदलाव मददगार हैं |
| ब्लोट (गैस फूलना) | बाईं कोख फूली हुई, हरे-भरे चारे के बाद बेचैनी | दलहनी चारागाह और अनाज में तेज़ बदलाव पर नियंत्रण रखें |
| पिंकआई (आँख का संक्रमण) | आँख से पानी बहना, भेंगापन, धुंधलापन | मक्खी नियंत्रण और छाया जोखिम घटाते हैं; जल्दी इलाज करें |
| खुर की समस्या / लंगड़ापन | लंगड़ाना, सूजन, चलने में हिचक | खुर छाँटें और ज़मीन को लगातार गीला न रहने दें |
रोकथाम की देखभाल
- स्थानीय क्षेत्र और बीमारी के जोखिम के अनुसार टीकाकरण और कृमिनाशक कार्यक्रम अपनाएँ।
- खुरों की नियमित जाँच और छँटाई करते रहें।
- मक्खी और किलनी नियंत्रण बनाए रखें और छाया तथा साफ़ पानी उपलब्ध कराएँ।
- नियमित रूप से शरीर की स्थिति जाँचें और ब्याने से पहले-बाद आहार में बदलाव करें।
- नियमित पशु-चिकित्सा जाँच और बैलों की प्रजनन-क्षमता जाँच का समय तय करें।
प्रजनन
ब्राह्मण मवेशी कई नस्लों से कुछ देर से प्रजनन योग्य होते हैं, करीब साढ़े नौ महीने गर्भधारण करते हैं, और एक ही बछड़ा जनते हैं जिसे गाय मज़बूत मातृ देखभाल के साथ पालती हैं।
ब्राह्मण की बछियाँ कई टॉरिन नस्लों की तुलना में थोड़ी देर से यौन परिपक्व होती हैं, और पशुपालक आमतौर पर बढ़त तथा शारीरिक स्थिति के अनुसार 18 से 24 महीने की उम्र में पहली बार उनका प्रजनन कराते हैं। बैल कम उम्र में ही उर्वर हो जाते हैं, पर इस्तेमाल से पहले उनकी प्रजनन-क्षमता जाँच होनी चाहिए।
प्रजनन प्राकृतिक मिलन या कृत्रिम गर्भाधान से होता है। गर्भधारण अवधि करीब 285 से 292 दिन तक चलती है, जो कई ब्रिटिश नस्लों की औसत अवधि से थोड़ी लंबी है। गायें लगभग हमेशा एक ही बछड़ा जनती हैं, जुड़वां होना दुर्लभ है। ब्राह्मण के बछड़े जन्म के समय अक्सर छोटे होते हैं, जिससे नस्ल को आसान ब्याने के लिए जाना जाता है, और इसके बाद वे लगातार बढ़ते हैं।
गायों में मातृ प्रवृत्ति मज़बूत होती है, वे अपने बछड़ों की रक्षा करती हैं और इतना दूध देती हैं कि चारागाह पर ही स्वस्थ बछड़ा पाल सकें। बछड़ों का दूध आमतौर पर 6 से 8 महीने की उम्र में छुड़ाया जाता है। इस नस्ल की मज़बूती और आसान ब्याना ही बड़ी वजहें हैं कि इसे संकरण कार्यक्रमों में इतनी व्यापकता से इस्तेमाल किया जाता है।
| माप | मान |
|---|---|
| प्रजनन आयु (बछिया) | लगभग 18 से 24 महीने |
| गर्भधारण अवधि | लगभग 285 से 292 दिन |
| प्रति ब्याने बछड़े | आमतौर पर 1 बछड़ा |
| जन्म का वजन | अक्सर अपेक्षाकृत कम, जिससे ब्याना आसान होता है |
| दूध छुड़ाने की उम्र | लगभग 6 से 8 महीने |
| गायों की उत्पादक आयु | अक्सर कई अन्य नस्लों से लंबी |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ब्राह्मण से जुड़े आम सवालों में इसका आकार, स्वभाव, देखभाल, आयु, अनुकूलता और यह नस्ल कहाँ पाई जाती है, शामिल हैं।
ब्राह्मण कितना बड़ा होता है?
ब्राह्मण एक बड़ी नस्ल है। बैलों का वजन आमतौर पर 800 से 1,100 किलोग्राम और गायों का 500 से 700 किलोग्राम होता है, बैल कंधे तक करीब 1.5 से 1.7 मीटर ऊँचे होते हैं।
ब्राह्मण का स्वभाव कैसा होता है?
ये बुद्धिमान और सतर्क होते हैं। कम उम्र से नियमित और शांत संभाल मिलने पर सीधे-सादे और काम में आसान बन जाते हैं, जबकि बिना संभाले छोड़े गए पशु सतर्क रह सकते हैं। गायें सुरक्षात्मक माँ होती हैं और बैल दबंग हो सकते हैं।
क्या ब्राह्मण मवेशियों की देखभाल मुश्किल है?
चारागाह पर इन्हें कम देखभाल चाहिए और ये अधिकांश नस्लों से बेहतर गर्मी, नमी तथा घटिया चारा झेल लेते हैं। मुख्यतः इन्हें छाया, साफ़ पानी, नियमित परजीवी व खुर देखभाल, और ठंडे-गीले मौसम में आश्रय चाहिए।
ब्राह्मण मवेशी कितने समय तक जीते हैं?
अच्छे प्रबंधन के साथ ये अक्सर 12 से 20 वर्ष तक जीते हैं, और उत्पादक गायें कई अन्य नस्लों की तुलना में झुंड में अधिक समय तक रह सकती हैं।
ब्राह्मण किस जलवायु और व्यवस्था के लिए उपयुक्त है?
यह नस्ल गर्म और नम इलाकों तथा विस्तृत चारागाह या रेंज व्यवस्था के लिए सबसे उपयुक्त है। छोटी जोत, बंद बाड़े या लंबे समय की ठंड-गीले मौसम के लिए यह उतनी उपयुक्त नहीं।
ब्राह्मण का संकरण में इतना इस्तेमाल क्यों होता है?
ब्राह्मण को किसी ब्रिटिश या यूरोपीय महाद्वीपीय नस्ल के साथ मिलाने पर गर्मी सहनशीलता, परजीवी प्रतिरोध, आसान ब्याना और मज़बूती, दूसरे माता-पिता के मांस गुणों के साथ मिल जाती है, जिससे मज़बूत संकर ओज मिलता है।
आज ब्राह्मण मवेशी कहाँ पाए जाते हैं?
भारतीय जेबू मवेशियों से अमेरिका के दक्षिणी राज्यों में विकसित यह नस्ल अब अमेरिका महाद्वीप, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और एशिया में पाली जाती है, और ब्रैंगस, सांता गर्ट्रूडिस तथा बीफमास्टर जैसी मिश्रित नस्लों की नींव है।
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